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मैंने उन्हें कहा था कि शॉर्ट गेंदों पर निर्भर न रहें, मयंक की कड़ी मेहनत रंग लाई: कोच देवेंद्र शर्मा

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में मयंक यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट चटकाए। लंबे समय बाद भारतीय टीम में लौटे मयंक की वापसी दमदार रही।

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में मयंक यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट चटकाए। लंबे समय बाद भारतीय टीम में लौटे मयंक की वापसी दमदार रही।

पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर की वजह से 21 महीने तक खेल से दूर रहने और न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में जुलाई 2025 में सर्जरी करवाने के बाद, हरारे स्पोर्ट्स क्लब में इंटरनेशनल क्रिकेट में सफल वापसी करते हुए 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का अवॉर्ड जीतना, दुनिया पर दोबारा छा जाने की दिशा में मयंक का सिर्फ पहला कदम है। ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने आईपीएल 2024 के शानदार सीजन में किया था।

दिल्ली के सॉनेट क्लब में मयंक के बचपन के कोच देवेंद्र शर्मा के लिए लंबे समय तक खेल से दूर रहने के बाद इस तेज गेंदबाज को लय में लौटते और अपनी तेज गेंदों से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को परेशान करते देखना राहत और संतुष्टि देने वाला था। कोच देवेंद्र ने 'आईएएनएस' के साथ खास बातचीत करते हुए कहा, "उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। मयंक को इतना अच्छा प्रदर्शन करते देखना बहुत सुखद था। उनके कोच के तौर पर मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि उसकी सारी मेहनत, जिसमें रिहैब का समय भी शामिल है, रंग लाई है। मुझे वह समय याद है जब वह बहुत परेशान थे, क्योंकि आईपीएल 2025 में पीठ की चोट के बाद उनके लिए चीजें ठीक नहीं चल रही थीं और वह लगातार बेंगलुरु में एनसीए (अब बीसीसीआी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) में थे। 20 जुलाई को जिम्बाब्वे रवाना होने से पहले मैंने उन्हें सलाह दी थी कि वह हर समय शॉर्ट बॉल डालने पर ही ध्यान न दे। मैंने उनसे कहा कि बस बल्लेबाज के फुटवर्क को देखो और उसी हिसाब से गेंदबाजी करो, और मेरी वह सलाह बहुत काम आई।"

मयंक ने पहले टी20 में बेहतरीन गेंदबाजी की। स्पंजी बाउंस वाली पिच पर उन्होंने एक तेज और उछाल वाली गेंद फेंकी जिसने ब्रायन बेनेट को चौंका दिया और गेंद बल्ले के हल्के किनारे से लगकर विकेटकीपर ईशान किशन के हाथों में चली गई। इस शुरुआती सफलता ने मयंक के लिए माहौल बना दिया; डियोन मायर्स पेसर की तेज गति का सामना करने में संघर्ष करते दिखे और उनके पैरों की मूवमेंट भी हिचकिचाहट भरी रही, और आखिरकार वे मयंक का शिकार बने।

मयंक की पहली 12 गेंदों में से 10 की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा थी, और उनकी सबसे तेज गेंद 149किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची। उनकी 24 गेंदों में से 21 गेंदें या तो 'शॉर्ट-ऑफ-लेंथ' थीं या 'गुड-लेंथ' एरिया में थीं; मयंक ने पिच से जबरदस्त तेजी और उछाल हासिल की, जिससे बल्लेबाज बार-बार मुश्किल में दिखे और गेंद उनके बल्ले के हैंडल के ऊपरी हिस्से पर लगी। कुल मिलाकर, मयंक को तेज गेंदबाजी करते और जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को अपनी गति से परेशान करते देखना क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक शानदार अनुभव था।

पीठ और कोहनी की चोट, साइड स्ट्रेन और पैर की उंगली के इन्फेक्शन से लेकर स्ट्रेस फ्रैक्चर तक की समस्याओं से उबरने के लिए 'सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' (सीओई) में लंबा समय बिताने के बाद मयंक का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना था कि अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी करते ही वे इसका पूरा फायदा उठाएं। उन्हें इस बात से भी मदद मिली कि उन्हें लगातार टीम की योजनाओं में शामिल रखा गया, जैसे टी20 वर्ल्ड कप वार्म-अप मैचों के लिए इंडिया ए टीम में उनका चयन और जून में न्यू चंडीगढ़ में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के दौरान नेट बॉलिंग करना।

भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के बचपन के कोच शर्मा ने आगे कहा, "जब भी आपको खेलने का मौका या अवसर मिले, तो उसे दोनों हाथों से लपक लेना चाहिए। मयंक के लिए पहला मैच खेलना और उसमें अच्छा प्रदर्शन करना बहुत जरूरी था, क्योंकि भविष्य के टी20 इंटरनेशनल मैचों के लिए दावेदारी बनाए रखने के लिए उन्हें खुद को साबित करना था, और उन्होंने सचमुच वही किया जो उनसे उम्मीद की गई थी।"

पीठ की गंभीर चोट के बाद तेज गेंदबाज के लिए वापसी का रास्ता शायद ही कभी आसान होता है, और शर्मा ने उन मुश्किल भरे दिनों में मयंक के सामने आई मानसिक चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "जब कोई खिलाड़ी चोट से जूझता है और उसे रिहैब करना पड़ता है, तो मन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। जैसे कि क्या मैं खेल पाऊंगा या नहीं, और अगर खेलूंगा भी, तो क्या पहले जैसा खेल पाऊंगा? इसका श्रेय उन्हें जाता है, उन्होंने बहुत लगन से अपना रिहैब किया। उन्होंने रोजाना एक्सरसाइज की और फिर सीओई में नियमित तौर से 15-20 ओवर गेंदबाजी करने लगे। ऐसे समय में, खिलाड़ी को आगे बढ़ने के लिए बस मोटिवेशन की जरूरत होती है। जैसे ‘हां, तुम यह कर सकते हो। तुम्हारे अंदर काबिलियत है।’ मैंने उनसे जो भी बातचीत की, उसका मकसद उन्हें मोटिवेट करना ही था।"

कोच ने आगे बताया, "जिम्बाब्वे जाने से पहले, मैंने उन्हें फोन करके कहा, ‘तुम्हें बहुत अच्छा मौका मिला है। इसका पूरा फायदा उठाओ और इसे हाथ से न जाने दो, क्योंकि अगर तुम यहां अच्छा खेलते हो, तो भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने का रास्ता बन जाएगा। इसका श्रेय उनकी कड़ी मेहनत और उस लगन को जाता है जो उन्होंने रोजाना अपना रिहैब ठीक से करने में दिखाई।"

शर्मा ने सीओई के मेडिकल और ट्रेनिंग स्टाफ की अहम भूमिका पर भी जोर दिया, जहां तेज गेंदबाजी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए बेहतरीन सुविधाओं तक पहुंच ने मयंक की रिकवरी को तेज किया और उनके कौशल को निखारने में मदद की। “उन्हें मैदान पर वापस लाने में मदद करने के लिए सीओई के लोगों को भी श्रेय दिया जाना चाहिए।सीओई में उनके ठीक होने के लिए जरूरी मशीनें और उपकरण मौजूद थे, ऐसी सुविधाएं दिल्ली में नहीं हैं। सीओई में रहने से उन्हें हर पहलू में बेहतर बनने में मदद मिली है और मुझे पूरा भरोसा है कि वह आने वाले मैचों में भी अच्छा प्रदर्शन करते रहेंगे।”

हालांकि, 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में डेब्यू करने के बाद मयंक की वापसी के लिए टी20 इंटरनेशनल फिलहाल एक मंच का काम कर रहे हैं, लेकिन देवेंद्र शर्मा ने बताया कि लंबे समय के प्लान में इस तेज गेंदबाज को लंबे फॉर्मेट के असली टेस्ट के लिए तैयार करने के लिए वर्कलोड क्षमता बढ़ाना भी शामिल है। “भारत के लिए दोबारा खेलने का मौका मिलने पर वह बहुत खुश थे। जब किसी खिलाड़ी को इंटरनेशनल लेवल पर खेलने के लिए दोबारा बुलाया जाता है, तो मन खुशी से भर जाता है क्योंकि सालों की सारी मेहनत क्रिकेट खेलने के लिए ही तो होती है, है ना? अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले इकलौते टेस्ट मैच से पहले उन्होंने चंडीगढ़ में भी प्रैक्टिस की थी।"

कोच ने आगे कहा, "हमारा अगला कदम उनकी फिटनेस को बेहतर बनाना और उन्हें वनडे और टेस्ट मैच खेलने के लिए तैयार करना है। उन्हें अब चोट नहीं लगनी चाहिए, क्योंकि उनकी भी वही सर्जरी हुई थी जो बुमराह की हुई थी। उनका रिहैब अच्छा रहा है और वे धीरे-धीरे अपना स्टैमिना बढ़ाएंगे। सीओई में 15-20 ओवर डालने के बाद, वे जल्द ही एक दिन में 25 ओवर डालने और टेस्ट मैच खेलने की कोशिश करेंगे।”

फिजिकल रिकवरी के अलावा, मयंक के खेल में सुधार के लिए तकनीकी बदलाव भी बहुत जरूरी रहे हैं। “क्रिकेट में, अगर हम सही तरीके से मेहनत करें, तो हमें सफलता जरूर मिलेगी। हर बल्लेबाज के हिसाब से लाइन और लेंथ अलग-अलग होती है - कुछ फ्रंट फुट पर अच्छा खेलते हैं, कुछ बैकफुट पर या दोनों तरह से। ऐसे में बॉलर को यह देखना होता है कि उन्हें कहां गेंदबाजी करनी है और उसी हिसाब से अलग-अलग तरह की विविधता लानी होती है। आईपीएल में उन्होंने ज्यादा शॉर्ट बॉल डाली थीं (इस बार उन्हें कोई विकेट नहीं मिला) और मैंने उनसे तब कहा था कि ऐसा न करें क्योंकि बल्लेबाज बैकफुट पर खड़ा होता है और उसके पास बॉल को हिट करने का समय होता है। इस वजह स े आपको उन्हें कम जगह (रूम) देनी चाहिए। मैंने इस बारे में उनसे बात की थी और कहा था कि बॉलिंग करने से पहले अच्छी तरह सोचें, तभी सफलता मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि वे आने वाले मैचों में अच्छी गेंदबाजी करेंगे।"

--आईएएनएस

एसएम/पीएम

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