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खेलो इंडिया डायलॉग : पीएम मोदी के संवाद से 'शहडोल' के युवाओं में स्पोर्ट्स के प्रति बढ़ा उत्साह

शहडोल, 27 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'खेलो इंडिया डायलॉग' के तहत देशभर के युवा एथलीट्स से वर्चुअल संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनके नाम से उनके राज्य और शहर की पहचान बनती है। उन्होंने सभी को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

शहडोल, 27 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'खेलो इंडिया डायलॉग' के तहत देशभर के युवा एथलीट्स से वर्चुअल संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनके नाम से उनके राज्य और शहर की पहचान बनती है। उन्होंने सभी को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

प्रधानमंत्री के संवाद का सीधा प्रसारण शहडोल स्थित 'पंडित शम्भूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय' के परिसर में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ कुलगुरु डॉ. राम शंकर, प्रोफेसर और कर्मचारी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री के संवाद को लेकर विद्यार्थियों और युवा खिलाड़ियों में उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने इसे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणादायक बताया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राम शंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री का युवा खिलाड़ियों से संवाद एक महत्वपूर्ण पहल है। समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि पढ़ाई ही सफलता का माध्यम है, जबकि खेल भी व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डॉ. राम शंकर ने कहा, "यह 'युवा संवाद' कार्यक्रम प्रधानमंत्री की बहुत ही शानदार पहल है। हमें यह समझना होगा कि हमारे देश में एक पुरानी कहावत थी: 'पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब।' असल में, यह लोगों के बीच फैली एक गलतफहमी थी। अगर आप विदेश जाएंगे, तो देखेंगे कि बच्चे पढ़ाई में बहुत अच्छे होते हैं। उनमें पढ़ाई-लिखाई की बेहतरीन काबिलियत होती है, और साथ ही वे खेलों में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इसलिए, जब आप खेलते हैं और एक खिलाड़ी के तौर पर हिस्सा लेते हैं, तो आप अपने शरीर को स्वस्थ रखते हैं। इससे न सिर्फ आपका शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि आपका मन भी शांत और तनाव-मुक्त रहता है।"

फुटबॉल कोच लक्ष्मी साईं ने कहा, "आज प्रधानमंत्री का संवाद कार्यक्रम था, जो खिलाड़ियों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि हर कोई चाहता है कि कोई उनकी बात समझे, उनका मार्गदर्शन करे और उनकी बात सुने। खिलाड़ियों के मन में जो भी विचार हों, या वे भविष्य में जो भी करना चाहते हों, उन्हें ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो उनकी बात सुने और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करे।"

फुटबॉल खिलाड़ी सानिया कुंडे ने कहा, "यह संवाद कार्यक्रम प्रधानमंत्री के सहयोग से आयोजित किया गया था, और हम यहां आकर अपने विचार साझा कर सके। उन्होंने खेलों के बारे में बात की, इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि मेरी उम्र के बच्चों को खेलों पर ध्यान देना चाहिए। यहां खेलों से जुड़े सभी लोगों को पूरी ईमानदारी से कोशिश करनी चाहिए, ताकि वे और आगे बढ़ सकें और ऊंचे स्तर पर खेल सकें। मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूं।"

--आईएएनएस

आरएसजी/एबीएम

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