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Jharkhand: देश के लिए 4 गोल्ड जीतने वाला खिलाड़ी आज बेच रहा सब्जी, रात में चलाता है कैब; सरकारी नौकरी का इंतजार जारी
 

Jharkhand: देश के लिए 4 गोल्ड जीतने वाला खिलाड़ी आज बेच रहा सब्जी, रात में चलाता है कैब; सरकारी नौकरी का इंतजार जारी


झारखंड की राजधानी रांची में एक होनहार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की कहानी सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है. देश के लिए थ्रोबॉल में चार गोल्ड मेडल जीत चुके अमरदीप आज परिवार का खर्च चलाने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं, आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वह रात में कैब भी चलाते हैं. खेल के मैदान पर देश का नाम रोशन करने वाले अमरदीप को अब भी सरकारी नौकरी का इंतजार है.

चार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का किया प्रतिनिधित्व

अमरदीप के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. उन्होंने 2015 में मलेशिया में आयोजित एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. इसके बाद 2017 में काठमांडू में इंडो-नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप, 2019 में बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप और 2026 में रांची में आयोजित इसी प्रतियोगिता के दूसरे संस्करण में हिस्सा लेकर गोल्ड मेडल जीता.

इतनी उपलब्धियों के बावजूद अमरदीप को अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी है.

Jharkhand की स्पोर्ट्स पॉलिसी पर उठाए सवाल

अमरदीप का कहना है कि उनके साथ खेलने वाले छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार के कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है. वहीं, झारखंड की खेल नीति के कारण उन्हें अब तक नौकरी और कैश अवॉर्ड का लाभ नहीं मिल पाया.

उन्होंने बताया कि साल 2016 में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी मामला लंबित है. अमरदीप पूर्व खेल मंत्री हफीजुल हसन से भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उनका कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिली.

परिवार चलाने के लिए बेचनी पड़ रही सब्जी

अमरदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है. उनके पिता रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचते हैं और परिवार की मदद के लिए अमरदीप को भी उनके साथ काम करना पड़ता है.

उनकी मां करीब 35 किलो सब्जी सिर पर रखकर घर-घर जाकर बेचती हैं, जबकि बड़े भाई ने फास्ट फूड का स्टॉल लगा रखा है. ऐसे हालात में अमरदीप के लिए परिवार की जिम्मेदारी के साथ खेल का खर्च उठाना भी बड़ी चुनौती बन गया है.

विदेश में खेलने के लिए लिया था कर्ज

अमरदीप ने बताया कि 2015 में मलेशिया जाने के लिए उन्हें करीब 65 हजार रुपये खर्च करने पड़े थे. इस रकम में से आधा खर्च झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने उठाया था, जबकि बाकी रकम की व्यवस्था उन्हें खुद करनी पड़ी.

खेल में लगातार मेहनत करने के बावजूद आर्थिक परेशानियां उनके सामने बनी हुई हैं.

कैब चलाकर परिवार का सहारा बन रहे अमरदीप

दिन में सब्जी बेचने में परिवार का हाथ बंटाने के बाद अमरदीप रात में कैब चलाते हैं. उनका कहना है कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें यह काम करना पड़ रहा है.

इसके बावजूद उन्होंने खेल को छोड़ने का फैसला नहीं किया है. वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे हैं.

अक्टूबर में श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता की तैयारी

अमरदीप ने बताया कि अक्टूबर में श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता के लिए वह अभी से अभ्यास कर रहे हैं. यानी आर्थिक परेशानियों और सरकारी नौकरी के लंबे इंतजार के बावजूद उन्होंने मैदान छोड़ने का फैसला नहीं किया है.

अमरदीप 2020 से लगातार सरकारी नौकरी के लिए प्रयास कर रहे हैं. उनका कहना है कि अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है. वर्षों तक इंतजार करने के बाद उनकी निराशा बढ़ती जा रही है, लेकिन देश के लिए खेलने का जज्बा अब भी कायम है.
 

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