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'मैं टूट चुकी थी...' लॉर्ड्स में शतक जड़ने वाली यास्तिका भाटिया ने सुनाया संघर्ष का किस्सा, स्मृति मंधाना को दिया सफलता का श्रेय

'मैं टूट चुकी थी...' लॉर्ड्स में शतक जड़ने वाली यास्तिका भाटिया ने सुनाया संघर्ष का किस्सा, स्मृति मंधाना को दिया सफलता का श्रेय

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज यास्तिका भाटिया इन दिनों लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर शानदार शतक लगाने के बाद सुर्खियों में हैं। इस यादगार पारी से उन्होंने इतिहास रच दिया, लेकिन इस उपलब्धि के पीछे संघर्ष और मुश्किल दौर की लंबी कहानी भी छिपी है। हाल ही में यास्तिका ने अपने करियर के कठिन समय को याद करते हुए बताया कि उस दौर में टीम की सीनियर बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने उनका हौसला बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी।

यास्तिका भाटिया ने एक बातचीत में कहा कि उनके करियर में ऐसा समय भी आया था, जब वह खुद पर भरोसा खोने लगी थीं। लगातार चुनौतियों और खराब दौर ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया था। उन्होंने बताया कि उस समय टीम के साथियों का समर्थन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

उन्होंने विशेष रूप से स्मृति मंधाना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हर मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया। यास्तिका के मुताबिक, स्मृति ने उन्हें लगातार सकारात्मक रहने, अपनी क्षमता पर विश्वास बनाए रखने और मेहनत जारी रखने की सलाह दी। यही समर्थन उन्हें दोबारा आत्मविश्वास हासिल करने में मददगार साबित हुआ।

लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर शतक लगाना किसी भी क्रिकेटर के लिए बेहद खास उपलब्धि माना जाता है। यास्तिका की यह पारी न सिर्फ उनके व्यक्तिगत करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में भी एक यादगार अध्याय बन गई। उनकी बल्लेबाजी की क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने जमकर सराहना की।

यास्तिका ने कहा कि क्रिकेट में उतार-चढ़ाव हर खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होते हैं। ऐसे समय में परिवार, कोच और टीम के साथियों का विश्वास ही खिलाड़ी को आगे बढ़ने की ताकत देता है। उन्होंने माना कि अगर स्मृति मंधाना और टीम का सहयोग नहीं मिलता, तो शायद वापसी करना इतना आसान नहीं होता।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम में स्मृति मंधाना को सिर्फ एक बेहतरीन बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करने वाली सीनियर खिलाड़ी के रूप में भी देखा जाता है। यास्तिका के बयान ने यह दिखाया कि टीम के भीतर आपसी विश्वास और सहयोग का माहौल खिलाड़ियों के प्रदर्शन में कितना बड़ा योगदान देता है।

यास्तिका भाटिया की यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि सफलता के पीछे सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और सही समय पर मिला साथ भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि कठिन दौर के बाद भी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है।

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