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हॉकी की नेशनल टीम तक कैसे पहुंचते हैं खिलाड़ी? जानिए किन घरेलू टूर्नामेंट के आधार पर होता है सिलेक्शन

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन एशियन गेम्स 2026 में कमाल का रहा। 28 साल बाद दोनों ही टीमों ने एक साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। आइए आपको बताते हैं किन घरेलू टूर्नामेंट्स में किया गया दमदार प्रदर्शन हॉकी में खिलाड़ियों को दिलाया है नेशनल टीम का टिकट।

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन एशियन गेम्स 2026 में कमाल का रहा। 28 साल बाद दोनों ही टीमों ने एक साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। आइए आपको बताते हैं किन घरेलू टूर्नामेंट्स में किया गया दमदार प्रदर्शन हॉकी में खिलाड़ियों को दिलाया है नेशनल टीम का टिकट।

हॉकी के खेल में दिलचस्पी रखने वाले खिलाड़ियों को पहले जिला स्तरीय टीम में अपनी जगह बनानी होती है। हॉकी इंडिया घरेलू स्तर पर हॉकी प्रतिभाओं को पहचान करने के लिए कई तरह के टूर्नामेंट्स का आयोजन करता है। जिला स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन प्लेयर्स को अपने राज्य की टीम में जगह दिलाता है। राज्य स्तर पर हॉकी इंडिया कई तरह के टूर्नामेंट कराता है।

भारत की नेशनल हॉकी टीम में जगह बनाने के लिए घरेलू स्तर पर सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन किया जाता है। इस टूर्नामेंट को सिलेक्शन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट माना जाता है। यह टूर्नामेंट साल 1928 में पहली बार खेला गया था। सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप को पहले रंगास्वामी कप के नाम से जाना जाता था। साल 2011 में इसका नाम बदला गया। इसमें हर राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और विभिन्न विभाग (रेलवे, पेट्रोलियम, सेना आदि) हिस्सा लेती हैं। इस टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करके खिलाड़ी सिलेक्टर्स की निगाहों में आते हैं और फिर उनका कैंप में ट्रायल होता है।

सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में कुल 29 टीमें हिस्सा लेती हैं। पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर टीमों को तीन डिवीजन में बांटा जाता है। डिवीजन ए में कुल 12 टीमें रहती हैं, जिन्हें तीन-तीन के चार पूल में बांटा जाता है। हर पूल की दो टीमें क्वार्टर फाइनल तक पहुंचती हैं। इसके बाद सेमीफाइनल में चार टीमों की भिड़ंत होती है और आखिर में दो टीमों के बीच खिताबी मुकाबला खेला जाता है।

वहीं, डिवीजन बी में कुल 10 टीमों को रखा जाता है, जिन्हें दो पूल में बांटा जाता है। इस डिवीजन में खेलने वाली टीमों का लक्ष्य शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अगले साल डिवीजन ए में प्रमोट होना होता है। डिवीजन सी में कुल 7 टीमें खेलती हैं, जिन्हें दो पूल में रखा जाता है। डिवीजन बी की तरह ही सी में भी टीमें प्रमोशन के लिए जोर लगाती हैं।

सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप के साथ-साथ हॉकी इंडिया अब हॉकी इंडिया लीग का भी आयोजन करता है, जिसमें दमदार प्रदर्शन करके खिलाड़ी नेशनल टीम में सिलेक्शन के लिए अपना दावा ठोकते हैं। इन टूर्नामेंट्स में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चुनकर हॉकी इंडिया एक कैंप का आयोजन कराता है, जहां खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस, रणनीतिक समझ से लेकर तमाम चीजों का टेस्ट लेने के बाद उन्हें भारतीय टीम में चुना जाता है। सरकार की तरफ से अब हॉकी में भी स्कूल स्तर पर टैलेंट की पहचान करके उन्हें बढ़ावा देने की पहल शुरू की गई है, जिसका फायदा भविष्य में मिलने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

एसएम/डीकेपी

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