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“भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत”: गंभीर की कार्यशैली पर एस. श्रीसंत का बयान, वीडियो में देंखे टेस्ट प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल

“भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत”: गंभीर की कार्यशैली पर एस. श्रीसंत का बयान, वीडियो में देंखे टेस्ट प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल

 

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर कोचिंग मॉडल और टीम मैनेजमेंट को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत को पारंपरिक कोच की नहीं, बल्कि एक मेंटर जैसी नेतृत्व शैली की जरूरत है।

एक इंटरव्यू के दौरान श्रीसंत ने कहा कि मौजूदा समय में खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डालने की बजाय उन्हें मार्गदर्शन और भरोसा देने वाला माहौल ज्यादा जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय टीम को उस तरह के नेतृत्व की आवश्यकता है जैसा पूर्व कप्तान एम. एस. धोनी ने अपने कार्यकाल में दिया था।

श्रीसंत ने सीधे शब्दों में कहा, “कोच बदल दीजिए। भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत है।” उनके इस बयान ने क्रिकेट हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने आगे कहा कि एक सफल टीम के लिए केवल तकनीकी कोचिंग ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि खिलाड़ियों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।उन्होंने यह भी कहा कि जब खिलाड़ी मानसिक रूप से स्वतंत्र और भरोसे में होते हैं, तो उनका प्रदर्शन बेहतर होता है। श्रीसंत के अनुसार, अत्यधिक दबाव और कठोर कोचिंग शैली कई बार खिलाड़ियों की प्राकृतिक क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

पूर्व तेज गेंदबाज ने भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। विशेष रूप से न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मिली हार को उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया।श्रीसंत का कहना है कि इन हारों के बाद टीम के दृष्टिकोण और रणनीति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने संकेत दिया कि कोचिंग स्टाइल और टीम मैनेजमेंट की सोच में बदलाव लाना जरूरी हो सकता है, ताकि खिलाड़ी बेहतर मानसिक स्थिति में मैदान पर उतर सकें।

क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय टीम में कोच और मेंटर की भूमिका को लेकर हमेशा बहस रही है। कुछ लोग मानते हैं कि आधुनिक क्रिकेट में डेटा-ड्रिवन और तकनीकी कोचिंग जरूरी है, जबकि कुछ का मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों के लिए भावनात्मक समर्थन और व्यक्तिगत मार्गदर्शन अधिक प्रभावी साबित होता है।

गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन से गुजर रही है। ऐसे में पूर्व खिलाड़ियों की ओ से आने वाले ऐसे बयान अक्सर टीम मैनेजमेंट और चयन प्रक्रिया पर नई बहस को जन्म देते हैं। फिलहाल, श्रीसंत के इस बयान पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) या कोच गौतम गंभीर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में क्रिकेट गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना रहेगा।

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