वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में बड़ा बदलाव संभव: टीमों की संख्या 9 से बढ़कर 12 हो सकती है, जुलाई में होगा अंतिम फैसला
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टेस्ट फॉर्मेट को और अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ICC World Test Championship में टीमों की संख्या बढ़ाने पर गंभीर विचार चल रहा है। मौजूदा 9 टीमों के बजाय इसे 12 टीमों तक विस्तार देने की योजना पर चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव के तहत दो प्रमुख एसोसिएट देशों—Afghanistan national cricket team और Zimbabwe national cricket team—को टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा एक और टीम को भी शामिल करने की संभावना पर चर्चा चल रही है, ताकि टूर्नामेंट का ढांचा और संतुलित बनाया जा सके।
क्रिकेट जगत में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि टेस्ट क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए ज्यादा देशों को नियमित मुकाबले खेलने का मौका मिलना चाहिए। वर्तमान में WTC का फॉर्मेट सीमित टीमों तक ही सिमटा हुआ है, जिसके कारण कई उभरते क्रिकेट देश इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता से बाहर रहते हैं।
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) इस प्रस्ताव पर विभिन्न बोर्डों के साथ बातचीत कर रही है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो न केवल टेस्ट क्रिकेट का दायरा बढ़ेगा, बल्कि छोटे और उभरते क्रिकेट देशों को भी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान जैसे देश ने हाल के वर्षों में सभी फॉर्मेट में तेजी से प्रगति की है, खासकर सीमित ओवर क्रिकेट में। हालांकि टेस्ट क्रिकेट में उनकी भागीदारी अभी सीमित है, लेकिन उन्हें WTC में शामिल करना इस फॉर्मेट के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
इसी तरह, जिम्बाब्वे भी टेस्ट क्रिकेट का एक पुराना हिस्सा रहा है और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी और स्थिरता की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इन टीमों को शामिल करने से प्रतियोगिता का स्तर और विविधता दोनों बढ़ सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बदलाव पर अंतिम निर्णय जुलाई में होने वाली ICC की प्रमुख बैठक में लिया जा सकता है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो अगले WTC चक्र से नया फॉर्मेट लागू किया जा सकता है, जिसमें ज्यादा मैच, नई टीमें और विस्तृत पॉइंट सिस्टम शामिल होने की संभावना है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि टीमों की संख्या बढ़ाने से शेड्यूलिंग और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। साथ ही, बड़ी टीमों के मुकाबले छोटे देशों के बीच प्रदर्शन अंतर भी एक चिंता का विषय हो सकता है।

