Birthday Special: लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, विराट कोहली की नजर रहती है जीत पर; इसलिए कहलाते हैं 'चेज मास्टर'
क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जैसे-जैसे रन की जरूरत बढ़ती है और विकेट गिरते हैं, बल्लेबाज पर दबाव भी बढ़ता जाता है। लेकिन विराट कोहली ने कई मौकों पर दिखाया है कि दबाव में भी संयम और आक्रामकता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है। यही वजह है कि उन्हें दुनिया के बेहतरीन रन चेज करने वाले बल्लेबाजों में गिना जाता है।
5 नवंबर को 38 साल के हुए विराट कोहली का बल्लेबाजी अंदाज सिर्फ बड़े शॉट लगाने तक सीमित नहीं है। वह पारी की शुरुआत में गेंद को समझने, स्ट्राइक रोटेट करने और फिर सही समय पर रन गति बढ़ाने पर ध्यान देते हैं। लक्ष्य का पीछा करते हुए उनकी यही रणनीति टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई है।
विराट की बल्लेबाजी की एक खास पहचान उनकी निरंतरता है। वनडे क्रिकेट में उनके नाम 55 शतक दर्ज हैं। आईसीसी के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने इस फॉर्मेट में 15 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं और उनका औसत 58 से अधिक है। ये आंकड़े बताते हैं कि वह लंबे समय तक बड़ी पारियां खेलने में कितने सफल रहे हैं।
उनकी यह क्षमता 4 नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड में खेले गए पहले वनडे में भी दिखाई दी। बारिश से प्रभावित मुकाबले में भारत को संशोधित लक्ष्य हासिल करना था। विराट ने 51 गेंदों पर 74 रन बनाए और टीम को पांच विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस पारी में उन्होंने अपना 80वां वनडे अर्धशतक भी पूरा किया। उनका जन्मदिन इस मुकाबले के अगले ही दिन है।
विराट की सफलता का एक कारण परिस्थितियों के हिसाब से खेलने की क्षमता भी है। जब टीम को टिककर बल्लेबाजी की जरूरत होती है, तब वह विकेट बचाने पर ध्यान देते हैं। वहीं, रन गति बढ़ाने की जरूरत पड़ने पर बाउंड्री लगाने से भी नहीं हिचकते।
क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में टीम को जीत तक पहुंचाना खिलाड़ी की असली पहचान बनाता है। विराट कोहली ने अपने करियर में कई बार यही करके दिखाया है। शायद इसलिए उनके प्रशंसकों के लिए वह सिर्फ रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं, बल्कि उम्मीद का नाम भी हैं।

