Samachar Nama
×

एशियन गेम्स में सिल्वर जीतकर घर लौटे मनु और प्रिंस, नेदुंबसेरी में जोरदार स्वागत

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स की सेलिंग (नौकायन) स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले मलयाली एथलीट मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल कुरिशिंगल का केरल के नेदुंबसेरी एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। इस मौके पर एथलीट्स के परिवार के सदस्य, दोस्त और वरापुझा पंचायत के अध्यक्ष विजू चुल्लीकाड मौजूद रहे।

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स की सेलिंग (नौकायन) स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले मलयाली एथलीट मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल कुरिशिंगल का केरल के नेदुंबसेरी एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। इस मौके पर एथलीट्स के परिवार के सदस्य, दोस्त और वरापुझा पंचायत के अध्यक्ष विजू चुल्लीकाड मौजूद रहे।

एथलीट्स ने बताया कि फाइनल के दिन उन्हें कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। चक्रवात के कारण तेज हवाएं चलने, कुछ छोटी-मोटी गलतियों और नाव में तकनीकी खराबी आने की वजह से उन्हें फाइनल के दिन काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस वजह से वे खिसककर चौथे स्थान पर आ गए थे, लेकिन फाइनल रेस में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने फिर से दूसरा स्थान हासिल कर लिया। हालांकि तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम के भी उतने ही अंक थे, लेकिन रेस में फिनिश करने की स्थिति के आधार पर उन्हें सिल्वर मेडल मिला।

एर्नाकुलम के रहने वाले मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल ने पुरुषों की सेलिंग स्किफ श्रेणी में सिल्वर मेडल जीता। इस जोड़ी ने नौ रेसों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 23 नेट पॉइंट्स के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

एथलीट्स ने कहा कि सेलिंग एक बहुत ही दिलचस्प खेल है जिसमें आगे बढ़ने के कई मौके हैं। उन्होंने अन्य लोगों को भी इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी इस उपलब्धि से देश और केरल को गर्व हुआ है।

प्रिंस नोबल ने पत्रकारों से कहा, "हमारे ग्रुप में काफी मजबूत प्रतियोगी थे। उनमें एक नहीं, बल्कि दो ओलंपियन शामिल थे। वे पहले ही अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और उनमें से एक ने तो वर्ल्ड कप भी जीता था। इसलिए मुकाबला काफी कड़ा था। आखिरी दिन तक हम आगे चल रहे थे। आखिरी दिन की शुरुआत में हमारे पास एक प्वाइंट्स की बढ़त थी। तीसरी रेस के बाद, ऐसा लगने लगा कि हम पिछड़ रहे हैं। हम लगभग चौथे स्थान पर खिसक गए थे, लेकिन हमें अपनी ट्रेनिंग पर पूरा भरोसा था। हमने वही करने की कोशिश की, जिसकी हमने हमेशा प्रैक्टिस की थी। हम अपनी रणनीति को सही ढंग से लागू करने में कामयाब रहे। ईश्वर की कृपा से, हमने रेस को ऐसे मुकाम पर खत्म किया कि हमें सिल्वर मेडल मिल गया।"

--आईएएनएस

आरएसजी/वीसी

Share this story

Tags