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अनुभवी खिलाड़ियों का संन्यास, विशेषज्ञों की अनदेखी, प्लेइंग इलेवन में लगातार बदलाव बना टेस्ट फॉर्मेट में टीम इंडिया की असफलता की वजह

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का प्रदर्शन टेस्ट क्रिकेट में निराशाजनक रहा है। भारतीय टीम अपने घर में टेस्ट सीरीज नहीं जीत पा रही है। शुरुआती 2 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने वाली टीम इंडिया के लिए अब फाइनल खेलना एक सपने की तरह लगने लगा है।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का प्रदर्शन टेस्ट क्रिकेट में निराशाजनक रहा है। भारतीय टीम अपने घर में टेस्ट सीरीज नहीं जीत पा रही है। शुरुआती 2 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने वाली टीम इंडिया के लिए अब फाइनल खेलना एक सपने की तरह लगने लगा है।

भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट फॉर्मेट में बदलाव के दौर से गुजर रही है। इस बदलाव का असर टीम के प्रदर्शन और परिणाम पर दिख रहा है। कभी अपने घर में टेस्ट में अजेय मानी जाने वाली भारतीय न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ न सिर्फ सीरीज हार रही है, बल्कि सीरीज के सभी मैच गंवा रही है। विदेशों में भी टेस्ट में टीम इंडिया के प्रदर्शन में गिरावट आई है।

बल्लेबाजी, हो या गेंदबाजी या फिर क्षेत्ररक्षण, खेल के तीनों विभागों में भारतीय टीम संघर्ष के दौर से गुजर रही है। यह स्थिति गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद ज्यादा देखने को मिली है।

गंभीर के हेड कोच बनने के बाद टेस्ट फॉर्मेट से कई दिग्गजों ने संन्यास लिया है। इसमें विराट कोहली, आर अश्विन और रोहित शर्मा प्रमुख हैं। कभी टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम का भरोसेमंद चेहरा रहे रहाणे ने भी हाल ही में टेस्ट टीम से लगभग 2 साल से ज्यादा समय तक बाहर रहने के बाद हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा है।

विराट और अश्विन पिछले एक दशक में भारतीय टीम को टेस्ट क्रिकेट में देश-विदेश में मिली सफलता की सबसे बड़ी वजह हैं। दोनों फिलहाल फिट हैं, विराट अंतरराष्ट्रीय वनडे और आईपीएल खेल रहे हैं, जबकि अश्विन लीग क्रिकेट में सक्रिय हैं। लेकिन, दोनों ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। विराट और अश्विन के संन्यास में टेस्ट में भारतीय टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों कमजोर की है। टीम इंडिया इन दोनों खिलाड़ियों के विकल्प के रूप में कई खिलाड़ियों को आजमा चुकी है, लेकिन सही विकल्प अभी तक नहीं मिल सका है।

टेस्ट क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों और टेस्ट के विशेषज्ञों की हमेशा जरूरत होती है। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम प्रयोग ज्यादा कर रही है, जिसका नुकसान सीधा प्रदर्शन पर दिख रहा है। मोहम्मद शमी लंबे समय से टीम से बाहर हैं। घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। शमी के अनुभव और गेंदबाजी क्षमता को देखते हुए वह मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक हैं, इसके बावजूद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं देकर युवा खिलाड़ियों को मौका देना, टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है। यही हाल अक्षर पटेल के साथ भी है। अक्षर गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। उन्हें अश्विन के बाद टेस्ट टीम का नियमित सदस्य माना जाता है, लेकिन वह टीम से बाहर हैं। उनकी जगह नए ऑलराउंडरों को ढूंढा जा रहा है। युवाओं को मौका देना गलत नहीं, लेकिन अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता।

सरफराज खान ने प्रथम श्रेणी में असाधारण प्रदर्शन किया है। वह राष्ट्रीय टीम के लिए भी कई अच्छी पारियां खेल चुके हैं, इसके बावजूद टीम में उनका स्थान नहीं है। कुलदीप यादव को नियमित तौर पर टेस्ट में मौका नहीं मिल रहा, इससे स्पिन गेंदबाजी कमजोर हो रही है। प्लेइंग इलेवन में लगातार बदलाव हो रहे जिसकी वजह से खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना है। लगातार बदलाव की वजह से खिलाड़ियों को पूर्ण क्षमता बाहर नहीं आ पा रही और टीम को नए भरोसेमंद टेस्ट क्रिकेटर नहीं मिल रहे।

कुल मिलाकर, भारतीय टीम की टेस्ट फॉर्मेट के प्रदर्शन में आई गिरावट की असल वजह अनुभवी खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना, टेस्ट विशेषज्ञ खिलाड़ियों को मौका न देना और प्लेइंग में लगातार बदलाव और गलत चुनाव रहा है। इसी वजह से हम घर और विदेश में टेस्ट जीतने में असफल साबित हो रहे हैं और अब लगातार दूसरी बार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौर से लगभग बाहर हो चुके हैं।

--आईएएनएस

पीएके

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