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आखिर क्यों 'रिवर्स स्वीप' नहीं खेलते थे चेतेश्वर पुजारा? खुद इस राज से उठाया पर्दा

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने बताया है कि 'रिवर्स स्वीप' जैसे आधुनिक आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश करना उनके बैटिंग स्टाइल के लिए सही नहीं होता। टेस्ट क्रिकेट में ऐसा करने से वह अपना विकेट गंवा सकते थे।
आखिर क्यों 'रिवर्स स्वीप' नहीं खेलते थे चेतेश्वर पुजारा? खुद इस राज से उठाया पर्दा

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने बताया है कि 'रिवर्स स्वीप' जैसे आधुनिक आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश करना उनके बैटिंग स्टाइल के लिए सही नहीं होता। टेस्ट क्रिकेट में ऐसा करने से वह अपना विकेट गंवा सकते थे।

इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने भारत की ओर से 103 टेस्ट मुकाबले खेले, जिसमें 43.60 की औसत के साथ 7,195 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 19 शतक और 35 अर्धशतक निकले। इसके अलावा, पुजारा ने भारत के लिए 5 वनडे मुकाबले भी खेले।

पूर्व क्रिकेटर ने यह बात 'जियो हॉटस्टार' पर भारत के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री के साथ एक हल्के-फुल्के अंदाज में की। उनसे शास्त्री ने मजाक में पूछा था कि अगर उन्हें करियर की शुरुआत में रिवर्स स्वीप की प्रैक्टिस करने को कहा जाता, तो उनकी क्या प्रतिक्रिया होती?

शास्त्री ने कहा, "जब मैं कोच था, पुजारा, अगर मैंने आपसे तीन साल पहले रिवर्स स्वीप की प्रैक्टिस करने को कहा होता, तो आप बैट लेकर मेरे पीछे दौड़ते। है ना?"

इसके जवाब में पुजारा ने कहा, "अगर मैंने किसी टेस्ट मैच में ऐसा शॉट खेला होता, तो रन नहीं बना पाता। मेरे तीनों स्टंप उड़ गए होते, क्योंकि मेरे लिए वह शॉट खेलना बहुत मुश्किल था।"

पूर्व कोच और बल्लेबाज की इस जोड़ी ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत की ऐतिहासिक जीत पर भी बात की, जहां चेतेश्वर पुजारा ने अहम भूमिका निभाई थी। 2018–19 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पुजारा ने 521 रन बनाए, जिसमें तीन शतक शामिल थे। वह सीरीज के सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे, जिन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया था। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टेस्ट सीरीज जीती।

इसके बाद 2020–21 सीरीज में भी पुजारा का धैर्य और दबाव झेलने की क्षमता टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थकाकर भारत की एक और ऐतिहासिक जीत में बड़ी भूमिका निभाई।

पुजारा की अहमियत पर शास्त्री ने कहा, "यह वर्ल्ड कप जीतने जैसा ही था। किसी भी एशियन टीम ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में कभी नहीं हराया था। इसलिए, यह सबसे मुश्किल दौरा था। पुजारा हमारे सैनिक थे। उन्होंने दोनों दौरों पर और यहां तक कि इंग्लैंड में भी चोटें खाईं, लेकिन फिर भी डटकर मुकाबला किया। उनकी मौजूदगी बहुत जरूरी थी। उनके बिना हम यह नहीं कर पाते।"

--आईएएनएस

आरएसजी

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