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भोलेनाथ को क्यों प्रिय है सावन का महीना? 3 मिनट के वीडियो में जानिए शिव और सावन के बीच गहरा आध्यात्मिक कनेक्शन

भोलेनाथ को क्यों प्रिय है सावन का महीना? 3 मिनट के वीडियो में जानिए शिव और सावन के बीच गहरा आध्यात्मिक कनेक्शन

अगर आप भगवान शिव के भक्त हैं और पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं तो आपको ये जरूर पता होगा कि भगवान शिव को सावन का महीना सबसे ज्यादा प्रिय है. कहा जाता है कि जो भी भक्त सावन में सच्चे मन से शिव की पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव को 12 महीनों में से सिर्फ सावन का महीना ही क्यों प्रिय है. (Connection Between Sawan And Lord Shiva) आखिर शिव और सावन के बीच क्या कनेक्शन है. आइए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं.

शिव को क्यों प्रिय है सावन
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माता सती ने प्रण किया था कि जब भी उनका जन्म हो तो उन्हें भगवान शिव ही पति के रूप में मिलें. इसके लिए उन्होंने अपने पिता राजा दक्ष के घर अपना शरीर त्याग दिया और हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में कठोर तपस्या की थी, जिसके चलते उनका विवाह भगवान शिव से हुआ. ऐसे में भगवान शिव को सावन का महीना बहुत पसंद है।

जब भोलेनाथ आते हैं रुद्र अवतार में
एक अन्य मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु शयन करते हैं और चतुर्दशी के दिन भगवान शिव भी शयन करते हैं और जब भगवान शिव शयन करते हैं, उस दिन को शयनोत्सव कहते हैं। इस दौरान भोलेनाथ अपने रुद्र अवतार में होते हैं। मान्यता है कि जब भगवान शिव अपने रुद्र अवतार में होते हैं, तो वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन इस अवतार में वे जल्दी क्रोधित भी हो जाते हैं। ऐसे में सावन के महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाता है, ताकि वे इस पूजा से प्रसन्न हों और सभी को अपना आशीर्वाद दें।

सावन में शिव गए थे ससुराल
इतना ही नहीं, कहा जाता है कि सावन के महीने में ही भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष पिया था और पहली बार भगवान शिव सावन के महीने में ही धरती पर अपने ससुराल आए थे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया था। ऐसे में कहा जाता है कि हर साल सावन के महीने में भगवान शिव धरती पर आते हैं और सभी को अपना आशीर्वाद देते हैं। कहा जाता है कि इसी महीने में मार कंडु ऋषि के पुत्र मार्कंडेय ने कठोर तपस्या की थी और भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

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