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गृहकलह से हैं परेशान? पति-पत्नी मिलकर करें गणेश अष्टकम पाठ के साथ ये असरदार उपाय, सुखमय होगा वैवाहिक जीवन 

गृहकलह से हैं परेशान? पति-पत्नी मिलकर करें गणेश अष्टकम पाठ के साथ ये असरदार उपाय, सुखमय होगा वैवाहिक जीवन 

आज के समय में वैवाहिक जीवन में तनाव और मतभेद आम बात हो गई है। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच झगड़े होना, संवाद का टूटना और मनमुटाव बढ़ना कई घरों में देखा जा सकता है। ऐसे हालात में रिश्तों में मधुरता बनाए रखना एक चुनौती बन जाता है। अगर आपके वैवाहिक जीवन में भी लगातार कलह बना हुआ है और समझाइश के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल रहा, तो धार्मिक उपायों की शरण लेना एक सकारात्मक विकल्प हो सकता है।


गणेश अष्टकम का पाठ: एक सरल और प्रभावी उपाय
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी की पूजा करने की परंपरा भी इसी विश्वास पर आधारित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश की उपासना करने से जीवन के कष्ट, मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और आर्थिक संकट दूर होते हैं।
गणेश अष्टकम एक ऐसा स्तोत्र है जिसमें भगवान गणेश की आठ स्तुति श्लोकों के माध्यम से आराधना की जाती है। यह पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है जिनके वैवाहिक जीवन में शांति और सामंजस्य की कमी है।

क्या है गणेश अष्टकम?
गणेश अष्टकम एक प्राचीन संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना आदिशंकराचार्य ने की थी। इसके आठ श्लोकों में गणपति की महिमा, उनका स्वरूप, उनके गुण और उनकी कृपा का गुणगान किया गया है। माना जाता है कि जो श्रद्धा से इसका पाठ करता है, उसके जीवन से सभी प्रकार की विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं।

पति-पत्नी मिलकर करें पाठ, बढ़ेगा आपसी प्रेम
यदि पति-पत्नी दोनों ही एक साथ गणेश अष्टकम का पाठ करें, तो इसका प्रभाव और भी अधिक होता है। इससे दोनों के बीच मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। एक साथ बैठकर भगवान की आराधना करने से आपसी संवाद सुधरता है, मनमुटाव घटते हैं और रिश्ते में फिर से मधुरता आने लगती है।

गणेश अष्टकम पाठ की विधि: कैसे करें ये उपाय
सुभाषित स्थान का चयन: गणेश अष्टकम का पाठ शांत और पवित्र स्थान पर करना चाहिए। यदि संभव हो तो घर के मंदिर में दीपक और धूप जलाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
स्नान और शुद्धता: पाठ करने से पहले स्नान कर लें और साफ वस्त्र पहनें। मानसिक और शारीरिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
संयुक्त पाठ: पति-पत्नी दोनों साथ बैठकर एक स्वर में गणेश अष्टकम का पाठ करें। इसका समय सुबह अथवा शाम हो सकता है।
नियमितता: इस उपाय को कम से कम 11 दिनों तक नियमित रूप से करें। यदि संभव हो तो इसे 21 या 31 दिन तक भी किया जा सकता है।
आरती और प्रसाद: पाठ के बाद भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें मोदक या बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं।

सिर्फ पाठ ही नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
धार्मिक उपाय तभी प्रभावी होते हैं जब उनके साथ व्यवहारिक प्रयास भी किए जाएं। इसलिए गणेश अष्टकम का पाठ करते समय निम्न बातों का भी ध्यान रखें:
एक-दूसरे की बातों को सुनने और समझने की कोशिश करें।
क्रोध पर नियंत्रण रखें और संवाद में मधुरता लाएं।
बीती बातों को भूलकर नए सिरे से रिश्ता शुरू करने की कोशिश करें।
यदि संभव हो तो सप्ताह में एक दिन बिना मोबाइल या टीवी के साथ में समय बिताएं।
एक-दूसरे के अच्छे गुणों को सराहें और छोटे प्रयासों की प्रशंसा करें।

गणेश जी की कृपा से सुधर सकता है जीवन
गणेश अष्टकम का पाठ एक आध्यात्मिक उपाय है, जो न सिर्फ मानसिक शांति देता है बल्कि रिश्तों को भी मजबूत करने में सहायक होता है। श्रद्धा, नियमितता और संयम के साथ किया गया यह उपाय जीवन की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मकता को बढ़ाता है। भगवान गणेश की कृपा से मन में शांति आती है, विचारों में स्पष्टता आती है और रिश्तों में समझदारी बढ़ती है।

यदि आपके वैवाहिक जीवन में लगातार झगड़े हो रहे हैं और हर प्रयास के बावजूद शांति नहीं आ रही, तो यह समय है कि आप अपने जीवन में आध्यात्मिकता को शामिल करें। गणेश अष्टकम का पाठ न केवल एक धार्मिक प्रक्रिया है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और दांपत्य जीवन में स्थायित्व लाने का एक प्रभावी माध्यम भी है। तो आज से ही शुरुआत करें और देखें कैसे आपके जीवन में भगवान गणेश की कृपा से सुख-शांति लौट आती है।

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