चूहों वाला ये मंदिर बन चुका है विदेशी टूरिस्ट्स की पहली पसंद, वीडियो में जानिए क्यों यहां खींचे चले आते है विदेशी सैलानी
राजस्थान के बीकानेर जिले के देसनोंक गांव में स्थित करणी माता मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि अब एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर चुका है। इस मंदिर को "चूहों वाला मंदिर" (Temple of Rats) के नाम से दुनियाभर में पहचान मिली है। यहां मौजूद लगभग 25,000 काले चूहे और कुछ दुर्लभ सफेद चूहे इस मंदिर को दुनियाभर के पर्यटकों के लिए रहस्यमय, अद्भुत और आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।
आस्था का अनूठा रूप
करणी माता को मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। माना जाता है कि वे 15वीं शताब्दी में धरती पर अवतरित हुई थीं और अपने जीवनकाल में कई चमत्कार किए। वे चारण जाति की थीं और उन्हें देवी के रूप में पूजने की परंपरा आज भी कायम है। भक्तों का मानना है कि करणी माता आज भी जीवित हैं और उनका मंदिर उनका स्थायी निवास स्थान है।मंदिर में चूहों की पूजा की जाती है और उन्हें “काबा” कहा जाता है। मान्यता है कि ये चूहे उनके अनुयायियों और परिजनों का पुनर्जन्म हैं। यही कारण है कि उन्हें यहां विशेष सम्मान दिया जाता है — उनके लिए विशेष भोजन तैयार होता है, दूध और मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं, और उन्हें हाथों से खिलाया जाता है।
पर्यटन के नजरिए से खास क्यों है यह मंदिर?
विदेशी पर्यटक करणी माता मंदिर में केवल धार्मिक आस्था के लिए नहीं आते, बल्कि यहां की संस्कृति, आस्थागत विविधता और इस स्थान के रहस्यमय पहलुओं को देखने के लिए भी खिंचे चले आते हैं। कुछ कारण जो इस मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विशिष्ट बनाते हैं:
अनूठा विषय — चूहों की पूजा:
दुनिया में शायद ही कोई और ऐसा मंदिर होगा जहां हजारों चूहे खुलेआम घूमते हों और उन्हें पूजा जाता हो। यह परंपरा विदेशी पर्यटकों को चौंकाती है, क्योंकि उनके देशों में चूहे बीमारी और डर का प्रतीक माने जाते हैं।
स्थापत्य कला और राजपूताना शैली:
मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है और इसकी वास्तुकला पारंपरिक राजस्थानी शैली में है। भव्य दरवाजे, नक्काशीदार खंभे और चांदी के द्वार मंदिर की शोभा को कई गुना बढ़ाते हैं। यह स्थापत्य प्रेमियों और इतिहासकारों के लिए बेहद आकर्षक है।
लोक मान्यताओं से जुड़ी रहस्यमयी कहानियां:
मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं जैसे कि — एक बच्चे के मरने के बाद करणी माता द्वारा उसे चूहे के रूप में पुनर्जीवित करना, या सफेद चूहों को देवी का अवतार मानना — विदेशी पर्यटकों में रहस्य और आध्यात्मिकता के प्रति जिज्ञासा बढ़ाते हैं।
फोटोग्राफी और डॉक्यूमेंट्री का केंद्र:
बीबीसी, नेशनल जियोग्राफिक और डिस्कवरी चैनल जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस इस मंदिर पर डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं। यही कारण है कि विश्वभर के फोटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री निर्माता इस मंदिर को शूट करने आते हैं।
स्थानीय संस्कृति और मेले:
करणी माता के जन्म और अन्य प्रमुख त्योहारों के अवसर पर लगने वाले मेलों में लोकनृत्य, संगीत, ऊंट सजावट प्रतियोगिताएं और पारंपरिक भोजन विदेशी पर्यटकों को भारतीय ग्रामीण संस्कृति से रूबरू कराते हैं।
आस्था और आचरण: एक संतुलन
मंदिर में प्रवेश करते समय सभी श्रद्धालुओं से कहा जाता है कि वे चूहों को नुकसान न पहुंचाएं। यदि किसी के पैरों तले कोई चूहा गलती से मर जाए, तो उसकी क्षतिपूर्ति के रूप में उसे सोने या चांदी की मूर्ति बनवाकर मंदिर में चढ़ानी होती है। यह नियम विदेशी सैलानियों को भी समझाया जाता है और वे इसका पूरा सम्मान करते हैं।
विदेशी पर्यटकों की प्रतिक्रियाएं
यूएस, यूके, जापान, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के पर्यटक इस मंदिर में आकर भारत की विविधता और आस्था से अचंभित हो जाते हैं। कई विदेशी ट्रैवल ब्लॉग्स और यूट्यूब चैनल्स पर करणी माता मंदिर को भारत के "most unusual tourist spots" में शामिल किया गया है।
सरकार और पर्यटन विभाग की भूमिका
राजस्थान पर्यटन विभाग करणी माता मंदिर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने के लिए विशेष प्रचार-प्रसार कर रहा है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग की सुविधा उपलब्ध है। बीकानेर से यह मंदिर लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और दिनभर यहां पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है।
निष्कर्ष
करणी माता मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां आध्यात्मिकता, संस्कृति और रहस्य का अनूठा संगम होता है। यह मंदिर बताता है कि आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं होती — यह पर्यटक, शोधकर्ता और आम नागरिक सभी के लिए सीखने और अनुभव करने का एक अनूठा केंद्र बन सकती है। यही वजह है कि करणी माता मंदिर अब सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि विश्व पर्यटन मानचित्र पर भी एक चमकता सितारा बन चुका है।

