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ये है राजस्थान के प्रसिद्ध माता मंदिर जहाँ दर्शन करने से ही दूर हो जाते है रोग-दोष और पाप, वीडियो में करे भव्य दर्शन 

ये है राजस्थान के प्रसिद्ध माता मंदिर जहाँ दर्शन करने से ही दूर हो जाते है रोग-दोष और पाप, वीडियो में करे भव्य दर्शन 

राजस्थान, जहां रेगिस्तान की रेत पर संस्कृति और आस्था की गहरी छाप देखने को मिलती है, यहां देवी दुर्गा के कई ऐसे शक्तिपीठ और मंदिर हैं जो भक्तों के लिए आस्था, शक्ति और सिद्धि के प्रतीक हैं। नवरात्रि हो या कोई खास त्योहार, लोग दूर-दूर से यहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि इन मंदिरों में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं। आइए जानते हैं राजस्थान के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में, जहां मां दुर्गा के दर्शन मात्र से ही मनचाहा फल मिल जाता है-


अर्बुदा देवी मंदिर - अर्बुदा देवी मंदिर अधर देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर राजस्थान के माउंट आबू से 3 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। मान्यता है कि यहां देवी पार्वती के होंठ गिरे थे, इसलिए यहां शक्तिपीठ स्थापित है। यहां मां अर्बुदा देवी की पूजा देवी कात्यायनी के रूप में की जाती है, क्योंकि अर्बुदा देवी को मां कात्यायनी का रूप कहा जाता है। वैसे तो यहां सालभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। '

नौसर माता मंदिर - अजमेर की नौसर घाटी में स्थित इस मंदिर में माता के नौ स्वरूपों (Ajmer Nausar Mata Temple) के एक साथ दर्शन होते हैं. इस मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण में भी मिलता है. जगत पिता ब्रह्मा ने पुष्कर में सृष्टि यज्ञ की रक्षा के लिए नौदुर्गा का आह्वान किया था. राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए माता अपने नौ स्वरूपों में एक साथ नाग पहाड़ी के मुख्य द्वार पर प्रकट हुई थीं, तब से माता अपने नौ स्वरूपों में यहां नाग पहाड़ी पर विराजमान हैं.

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर - बांसवाड़ा से करीब 20 किलोमीटर दूर तलवारा गांव में अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच माता त्रिपुर सुंदरी (Tripura Sundari Temple of Banswara) का भव्य मंदिर मौजूद है. सिंहवाहिनी मां भगवती त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति में अठारह भुजाएं हैं. 5 फीट ऊंची मूर्ति में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रतिकृतियां हैं. मां सिंह, मयूर और कमलासिनी होने के कारण एक दिन में तीन रूप धारण करती हैं. जिसमें सुबह के समय माता कुमारिका, दोपहर में युवा और शाम को प्रौढ़ रूप में नजर आती हैं।

मणिबंध शक्तिपीठ - मणिबंध शक्तिपीठ प्रदेश के पुष्कर में स्थित है। मणिबंध शक्तिपीठ को मणिवेदिका शक्तिपीठ (पुष्कर का मणिबंध शक्तिपीठ) और गायत्री मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जो पहाड़ की चोटी पर स्थित है। यहां माता सती की दोनों कलाइयां गिरी थीं। साथ ही यहां माता सती को मणिवेदिका और गायत्री के रूप में पूजा जाता है, जबकि भगवान शिव को सर्वानंद के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर गायत्री मंत्र की साधना के लिए पवित्र माना जाता है।

अंबिका पीठ - माता अंबिका का प्रसिद्ध मंदिर राजधानी जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर विराटनगर में स्थित है। कहा जाता है कि यहां माता सती के बाएं पैर की अंगुलियां गिरी थीं। जिससे इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई। यहां माता सती को अंबिका और भगवान शिव को अमृतेश्वर के रूप में पूजा जाता है। वर्ष में दो बार, यानी अप्रैल (चैत्र माह) और सितंबर-अक्टूबर (आश्विन माह) में नवरात्रि के दौरान, यहां देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

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