ये हैं गणेशजी की सूंड, लंबे कान और बड़ा पेट का रहस्य!
जयपुर। भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना जाता है। भगवान गणेश जी का व्यक्तित्व आकर्षक होने के साथ ही जीवन के कई रहस्यों को अपने में समेटे हुए है। भगवान गणेश जी का मुहं हाथी का है तो वहीं इनका वाहन मूषक है। भगवान गणेश की दो पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि हैं। भगवान
जयपुर। भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना जाता है। भगवान गणेश जी का व्यक्तित्व आकर्षक होने के साथ ही जीवन के कई रहस्यों को अपने में समेटे हुए है। भगवान गणेश जी का मुहं हाथी का है तो वहीं इनका वाहन मूषक है। भगवान गणेश की दो पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि हैं। भगवान गणेश विघ्नहर्ता कहते हैं इसलिए किसी भी मांगलिक पूजा में या काम में सबसे पहले इनका नाम लिया जाता है। आज इस लेख में गणेश जी की विशिष्टता के बारे में बता रहें हैं।

वेदों में माना जाता है कि गणेश जी की पूजा के बगैर कोई भी काम शुरु नहीं किया जाता। गणेश जी को आदिदेव माना गया है। वैदिक ऋचाओं में गणेश जी का अस्तित्व हमेशा रहा है।

- भगवान गणेश के शरीर के आकार के अनुसार गणेश जी का वाहन चूहा काफी छोटा है। चूहे के बारे में हम सभी जानतें हैं कि ये चीजों को कुतरता। जिस प्रकार गणेश जी बुद्धि के दाता है इसके साथ ही गणेश जी तर्क-वितर्क में भी बेजोड़ हैं। ठीक ऐसे ही मूषक यानी चूहा भी तर्क-वितर्क में कभी पीछे नहीं हैं। चूहें के इन्ही गुणों के कारण ये भगवान गणेश जी का वाहन बना।

- गणेश जी सूंड जो हमेशा हिलती डुलती रहती है इसका अर्थ होता है सचेत होने का। गणेश जी हमेशा अनिष्टकारी शक्तियां को दूर करते हैं। गणेश जी की सूंड शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
- गणेश जी का बढा पेट जिसके कारण इनका नाम लंबोदर पड़ा। गणेश जी के लंबोदर यह दर्शाता है जीवन में कुछ भी अच्छा या बुरा हो उस सब को समान भाव से अपने जीवन मे ग्रहण करना।

- गणेश जी के लंबे कान जिसके कारण इनको गजकर्ण कहा जाता है। लंबे कान हमेशा भाग्यशाली होने का प्रतीक माने जाते हैं। लंबे कानों जहां सबकी सुनते हैं वहीं हर बात पर बुद्धि और विवेक से निर्णय लेते हैं। बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने की सलाह देते हैं।

