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हर सोमवार को करे भगवान शिव के चमत्कारी स्तोत्र का पाठ! पर्स और तिजोरी में कभी नहीं होगी धन की कमी, वीडियो में जाने विधि 

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सनातन धर्म में भगवान शिव का स्थान अत्यंत ऊंचा है। वे संहारक होते हुए भी कल्याणकारी हैं, रुद्र होते हुए भी करुणामय हैं। कहा जाता है कि भोलेनाथ को प्रसन्न करना सबसे सरल है, क्योंकि वे भक्तों की सरल भावना मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आप जीवन में धन, समृद्धि, सुख और मानसिक शांति चाहते हैं, तो हर सोमवार पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करना एक अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है।


क्या है पंचाक्षर स्तोत्र?
पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव के पांच प्रमुख अक्षरों — ‘न’, ‘म’, ‘शि’, ‘वा’, ‘य’ — के आधार पर रचा गया है। आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा रचित यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण और शक्तिशाली स्तवन है। इसमें प्रत्येक अक्षर के महत्व और उसके दिव्य प्रभाव को सुंदर श्लोकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।पंचाक्षर स्तोत्र के माध्यम से साधक भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का आह्वान करता है और उनकी कृपा से अपने जीवन को संवारने की प्रार्थना करता है।

सोमवार का विशेष महत्व
हिंदू परंपरा में सोमवार का दिन विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर, जलाभिषेक कर, रुद्राभिषेक कर और मंत्रों का जप कर शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। सोमवार को पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं।कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक हर सोमवार इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन में स्थायी सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ कैसे करें?
प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
अगर संभव हो तो शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
एक शांत स्थान पर बैठकर पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें।
पाठ करते समय मन को एकाग्र और भावनाओं को शुद्ध रखें।
पाठ के अंत में भगवान शिव से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन से दुःख-दरिद्रता को दूर करें।

पंचाक्षर स्तोत्र के प्रमुख लाभ
1. धन और समृद्धि में वृद्धि

पंचाक्षर स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक समृद्धि आती है। कार्यों में सफलता मिलती है और दरिद्रता दूर होती है।

2. स्वास्थ्य लाभ
यह स्तोत्र मानसिक तनाव, चिंता और भय को दूर करता है। शास्त्रों के अनुसार, शिव के नाम का जप करने से आयु बढ़ती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

3. दुर्भाग्य का नाश
अगर जीवन में बार-बार असफलताएं मिल रही हैं या घर में नकारात्मकता का वातावरण है, तो पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से दुर्भाग्य दूर होकर सौभाग्य का उदय होता है।

4. आध्यात्मिक उन्नति
जो साधक श्रद्धा और नियम से पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करते हैं, उनके भीतर अध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। उनके मन से भय, लोभ और मोह का नाश होता है।

5. शत्रु बाधा से मुक्ति
शिव के पंचाक्षर मंत्र का प्रभाव शत्रुओं को शांत करने वाला है। इसके प्रभाव से साधक की रक्षा होती है और शत्रुओं का दमन होता है।

पंचाक्षर स्तोत्र का एक अंश
यहां पंचाक्षर स्तोत्र का एक छोटा सा अंश प्रस्तुत है:

"नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै 'न' काराय नमः शिवाय।।"

हर श्लोक में भगवान शिव के किसी एक गुण या रूप की भव्यता का वर्णन किया गया है, जो साधक के मन में भक्ति और श्रद्धा को जागृत करता है।

कुछ महत्वपूर्ण बातें जिनका ध्यान रखें
पाठ के समय किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।
मोबाइल, टीवी या अन्य ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहें।
पाठ के बाद शिवजी से आभार व्यक्त करना न भूलें।
यदि समय न मिले तो कम से कम एक बार श्रद्धापूर्वक पूरा स्तोत्र अवश्य पढ़ें।

निष्कर्ष
भगवान शिव को प्रसन्न करना जितना सरल है, उतना ही प्रभावशाली भी है। यदि आप अपने जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की चाह रखते हैं, तो हर सोमवार पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें। यह साधना न केवल सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि आपको आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक भी पहुंचाती है।

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