ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा को सबसे पवित्र बताया गया हैं चार धाम के बारे में हमारे शास्त्रों में विस्तार से बताया गया है दैविक काल में इन स्थानों को अन्य नामों से जाना जाता था। वर्तमान समय में चार धाम के नाम भिन्न हैं हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु चार धाम की धार्मिक यात्रा करते हैं महामारी के चलते चार धाम यात्रा पर व्यापक असर पड़ा है इसके बावजूद श्रद्धालु कोरोना नियमों का पालन कर चार धाम की यात्रा करते हैं तो आज हम आपको चार धाम के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

बद्रीनाथ उत्तराखंड के चमोली जिले में हैं हर साल दीवाली के अगले दिन से सर्दियों में बद्रीनाथ के कपाट को बंद कर दिया जाता है इसके बाद ग्रीष्म ऋतु में कपाट को पुन खोला जाता है सर्दी के दिनों में बद्रीनाथ बर्फ की चादरों से ढकी रहती हैं बद्रीनाथ चार धामों में एक धाम हैं। महाभारत काव्य में वर्णित है कि द्वारका भगवान कृष्ण की राजधानी थी। यह शहर गुजरात राज्य में स्थित है

गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के पड़पोते ने करवाया है कालांतर से मंदिर का विस्तार होता रहा है इसका व्यापार विस्तार 17 वीं शताब्दी में हुआ हैं। जगन्नाथ मंदिर ओड़िशा में स्थित है इस मंदिर में श्रीकृष्ण समेत बलराम और बहन सुभद्रा की पूजा की जाती हैं आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती हैं रथ यात्रा देवशनी एकादशी के दिन समाप्त होती हैं। सामान्य दिनों में भी भक्तों की भीड़ लगी रहती हैं।

चार धाम में एक धाम रामेश्वरम है मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका जाते वक्त रामेश्वरम में शिव जी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा की थी। यह प्रतिमा रामजी ने स्वंय अपने हाथों से बनाई थी। रामजी ने शिवलिंग का नाम रामेश्वरम रखा था। त्रेत युग से रामेश्वर में शिव की पूजा होती हैं वर्तमान समय में रामेश्वर प्रभु तीर्थ स्थल है बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामेश्वर तीर्थ यात्रा पर जाते हैं।


