ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म में दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है जो कि बेहद ही खास होता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की विधिवत पूजा की जाती है इस साल यह पर्व 14 नवंबर दिन बुधवार को मनाया जा रहा है। इस दिन लोग अपने घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की आकृति बनाते हैं और इसकी विधिवत पूजा करते हैं।

भगवान को 56 भोग चढ़ाए जाते हैं मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर परिवार में सदा सुख शांति व समृद्धि वास करती है ऐसे में अगर आप भी गोवर्धन पूजा को करीब से जानना चाहते हैं तो कान्हा की नगरी के दर्शन जरूर करें। तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा इस पर्व से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

शास्त्र अनुसार गोवर्धन पूजा का पर्व भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्णर से संबंधित माना जाता है जो कि भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ा है। मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण जी का बचपन गोकुल वृंदावन में गुजरा है और यही पर गोवर्धन पर्वत भी स्थित है। ऐसे में अगर आप अभी छुट्टी पर है तो आप अपने परिवार व मित्रों के साथ इस दिन के महत्व को जानने के लिए भगवान कृष्ण की नगरी घूमने जा सकते हैं। क्योंकि गोवर्धन पूजा के दिन यहां पर उत्सव का माहौल होता है।

हर साल गोवर्धन पूजा के अवसर पर लोग मथुरा बरसाना पहुंचकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं और अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत व श्रीकृष्ण को अर्पित करते हैं। इस खास मौके पर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी की जाती है। मान्यता है कि इस दिन परिक्रमा करने से भक्तों व साधको की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगर कोई चारधाम की यात्रा नहीं कर पा रहा है तो ऐसे में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने मात्र से ही जातक को चार धाम यात्रा जितना फल मिलता है और श्रीकृष्ण की कृपा भी प्राप्त होती है।


