ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म में महाभारत को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है ये एक ऐसी पौराणिक कथा है जिसके बारे में अधिकतर लोगों ने सुना, पढ़ा और देखा होगा। इसके कुछ किरदार आज भी लोगों की जुबान पर है उन्हीं में से एक नाम है कर्ण, महाभारत के प्रमुख पात्रों में कर्ण का भी नाम शामिल है कर्ण को उनकी बहादुरी, दानवीरता, वचन और मित्रता के लिए आज भी याद किया जाता है

ग्रंथों के अनुसार महाभारत के युद्ध के 17वें दिन वीर कर्ण की मृत्यु हुई थी कर्ण की वीरता और दानवीरता से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उनके जीवन के अंतिम क्षणों में एक वरदान मांगने को कहा था तब कर्ण ने उनसे अपने अंतिम संस्कार के लिए ऐसी भूमि मांगी जहां पहले कभी किसी का अंतिम संस्कार न हुआ हो। कर्ण का अंतिम संस्कार जिस स्थान पर हुआ था वह आज भी रहस्यों से भरी है तो आज हम आपको उसी के बारे में अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

शास्त्र अनुसार श्रीकृष्ण भगवान को पूरी धरती पर भूमि का कोई भी ऐसा टुकड़ा नहीं मिला जहां पहले किसी मनुष्य का अंतिम संस्कार न हुआ हो, बहुत तलाशने के बाद उन्हें सूरत शहर में ताप्ती नदी के किनारे एक इंच जमीन मिली थी जहां पहले कभी किसी का दाह संस्कार नहीं किया गया था यहां के लोगों का मानना है कि कर्ण की इच्छा के मुताबिक श्रीकृष्ण भगवान स्वयं उनका दाह संस्कार करने के लिए यहां आए थे

यहां एक इंच भूमि पर शव रखना असंभव था ऐसे में उन्होंने उस भूमि के टुकड़े पर पहले एक बाण रखा। इसकेबाद उस पर कर्ण का शरीर रखकर दाह संस्कार किया था इस पवित्र स्थान को आज तुल्सीबड़ी मंदिर के नाम से जाना और पहचाना जाता है इस पवित्र स्थल पर आज भी लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं इस मंदिर को लेकर लोगों की बहुत गहरी आस्था और श्रद्धा है मान्यता है कि यहां पूजा पाठ करने से इच्छा पूर्ण होने का आशीर्वाद मिलता है।


