ज्योतिष न्यूज़ डेस्कः आज यानी 2 अगस्त दिन मंगलवार को देशभर में नाग पंचमी का उत्सव मनाया जा रहा है इस दिन भगवान शिव के साथ साथ अष्ट नागों की पूजा आराधना की जाती है ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन नाग देवता की पूजा करने से उनसे लगने वाला भय समाप्त हो जाता है तो आज नाग पंचमी के शुभ अवसर पर हम आपको प्रयागराज में दारागंज के नागवासुकी मंदिर की महिमा के बारे में बता रहे हैं

इस मंदिर में पूजा अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है नाग पचंमी के दिन इस पवित्र स्थल पर भक्तों का तांता लग जाता है ऐसी मान्यता है कि इस दौरान मंदिर में विग्रह के दर्शन करने मात्र से भक्तों के सभी पाप दूर हो जाते हैं और कालसर्पदोष से भी छुटकारा मिलता है तो आज हम आपको इस पवित्र स्थल के बारे में पूर्ण जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

आपको बता दें कि नागवासुकी मंदिर में वैसे सालभर सन्नाटा रहता है मगर श्रावण मास और नाग पंचमी के पावन दिनों में इस पवित्र मंदिर में भक्तों का जमघट लग जाता है प्रयागराज में नागपंचमी का मेला विशेष प्रसिद्ध माना जाता है इसकी परंपरा महाराष्ट्र के पैष्ण तीर्थ से जुड़ी मानी जाती है जो नासिक की तरह गोदावरी के तट पर स्थित है नागवासुकी मंदिर अपने अनूठे वास्तुकाल के लिए भी जाना जाता है ये दुनिया का एक अकेला मंदिर है जहां नागवासुकि की आदमकद की प्रतिमा स्थापित है वही मंदिर के मुख्य दवार पर शंख बजाते हुए दो कीचक बने हुए है जिनके बीच में लक्ष्मी के प्रतीक कमल दो हार्थियों के साथ बना हुआ है इस मंदिर की कलात्मकता सबसे अधिक भक्तों को आकर्षित करती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रयागराज के नागवासुकी मंदिर में नाग पंचमी या सावन के दिनों में विशेष पूजा आराधना करने से कालसर्प दोष का शमन होता है और जातक के जीवन की सभी तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती है आपको बता दें कि हमारे देश में कालसर्प दोष निवार की विशेष पूजा अर्चना त्रयबंकेश्वर, उज्जैन, हरिदवार और वाराणसी में मुख्य तौर पर होती है मगर नागवासुकि मंदिर भी दोष निवारण के लिए भक्तों के बीच खूब प्रसिद्ध है इस मंदिर में आज के दिन बहुत अधिक संख्या में भक्तजन आकर नाग देवता की विधिवत पूजा अर्चना करते हैं और अपने कष्टों का निवारण करते हैं।


