ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म में पूजा पाठ के साथ साथ पूजन स्थल को भी बेहद ही खास माना जाता है वही उत्तराखंड को देवों की भूमि माना गया है इस पावन धरा पर चारधाम यात्रा की जाती है इनमें एक पवित्र स्थल गंगोत्री भी है चारधाम यात्रा के दूसरे पड़ाव में गंगोत्री की यात्रा करने का विशेष विधान है

वही तीन अन्य धाम यमुनोत्री, केदानाथ और बद्रीनाथ हैं गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है आसान शब्दों में अगर कहे तो उत्तराखंड के गढ़वाल में गंगोत्री हिमनद से गंगा नदी निकलती है समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 3042 मीटर है नदी की धारा को भागीरथी के नाम से जाना जाता हैं तो आज हम आपको इसके बारे में सबकुछ बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

गंगा नदी की धारा देवप्रयाग में अलकनंदा में जा मिलती है इस जगह से भागीरथी और अलकनंदा गंगा कहलाती है अत: देवप्रयाग को संगम स्थल कहा जाता है बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवप्रयाग में गंगा स्नान हेतु आते हैं कालांतर से गंगोत्री में गंगा माता की पूजा की जाती है पूर्व में गंगा की जलधारा की पूजा की जाती है समय के साथ गंगोत्री के आसपास शहद और कस्बे बसने लगे। उस वक्त लोग गंगा नदी के किनारे गंगा मैया और अन्य देवी देवताओं की मूर्ति बनाकर पूजा उपासना किया करते थे।

वही आधुनिक इतिहास में गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा गंगा मंदिर का निर्माण करवाया गया। वही जयपुर के राजा माधो सिंह द्वितीय ने गंगा मंदिर का जीणोद्धार करवाया। आज गंगोत्री में बेहद खूबसूरत गंगा मंदिर है गंगोत्री के आसपास के कई अन्य धार्मिक स्थल है इनमें मुखबा गांव, भैरों घाटी, हर्षिल, नंदनवन तपोवन, गंगोत्री चिरबासा और केदारताल प्रमुख हैं यह पवित्र स्थल शीत ऋतू में बंद रहते हैं इसके बाद ग्रीष्मकाल में खुलता है। गंगोत्री की धार्मिक यात्रा पर जाने के लिए शुभ समय अप्रैल से लेकर नवंबर है मानसून के दिनों में यात्रा करना अनुकूल नहीं है।


