Samachar Nama
×

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन भगवती स्तोत्र का पाठ करें और सभी संकटों से मुक्ति प्राप्त करें, 2 मिनट के वीडियो में जानिए इसके अद्भुत लाभ

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन भगवती स्तोत्र का पाठ करें और सभी संकटों से मुक्ति प्राप्त करें, 2 मिनट के वीडियो में जानिए इसके अद्भुत लाभ

भारतीय हिन्दू धर्म में प्रत्येक तिथि और पर्व का महत्व है, और इनमें से एक महत्वपूर्ण पर्व है मासिक दुर्गाष्टमी। यह पर्व विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा और आराधना से जुड़ा हुआ है, जो न केवल शारीरिक और मानसिक शक्ति की देवी हैं, बल्कि दुखों और संकटों को दूर करने वाली भी हैं। इस दिन विशेष रूप से देवी भगवती के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, और उन रूपों में से एक है भगवती स्तोत्र।हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है।भगवती स्तोत्र का पाठ, जो महर्षि व्यास द्वारा रचित है, एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावी उपाय माना जाता है। यह स्तोत्र व्यक्ति को न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि उसके जीवन के सभी प्रकार के संकटों को दूर करने में भी सहायक होता है। विशेष रूप से मासिक दुर्गाष्टमी के दिन इस स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि क्यों और कैसे व्यास जी कृत भगवती स्तोत्र का पाठ इस दिन किया जाना चाहिए और इसके क्या अद्भुत लाभ हैं।


मासिक दुर्गाष्टमी: महत्व और विशेषताएँ
मासिक दुर्गाष्टमी हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह तिथि देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित होती है। दुर्गाष्टमी का पर्व विशेष रूप से उस दिन मनाया जाता है जब माता दुर्गा ने राक्षसों का नाश कर धर्म की पुनः स्थापना की थी। इस दिन माता दुर्गा की पूजा और आराधना से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिन विशेष रूप से देवी दुर्गा के भक्तों को उनके जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली प्राप्त करने का अवसर देता है। यही कारण है कि इस दिन मां भगवती के स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा रही है, जो विशेष रूप से संकटों और रोगों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।

व्यास जी कृत भगवती स्तोत्र का महत्व
व्यास जी कृत भगवती स्तोत्र एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे महर्षि व्यास ने रचा। यह स्तोत्र देवी भगवती की शक्तियों की वंदना करता है और उनके विभिन्न रूपों को सम्मानित करता है। इस स्तोत्र का पाठ मानसिक और शारीरिक विकारों, पारिवारिक समस्याओं और दैवीय संकटों से मुक्ति दिलाता है।भगवती स्तोत्र का पाठ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में तात्कालिक और स्थायी सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से जीवन में आ रही चुनौतियों, रोगों और नकारात्मकताओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा, इसे पढ़ने से व्यक्ति का भाग्य जागृत होता है, और जीवन में नये अवसर प्राप्त होते हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी पर भगवती स्तोत्र का पाठ: लाभ और प्रभाव
1. सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन भगवती स्तोत्र का पाठ करने से सभी प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलता है। जीवन में यदि कोई कष्ट या कठिनाई हो, तो इस दिन भगवती स्तोत्र का पाठ उस संकट को नष्ट करने में सक्षम होता है। यह पाठ विशेष रूप से जीवन में नकारात्मकता को समाप्त करने का कार्य करता है।

लाभ:
व्यक्तिगत संकटों से मुक्ति
मानसिक शांति प्राप्त होती है
जीवन में नए अवसरों का मिलना

2. स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा
कई बार शारीरिक समस्याओं के कारण जीवन में तनाव और परेशानियां बढ़ जाती हैं। व्यास जी कृत भगवती स्तोत्र का नियमित पाठ शारीरिक रोगों को समाप्त करने का एक अद्भुत उपाय है। यह स्तोत्र न केवल मानसिक तनाव को दूर करता है, बल्कि शारीरिक बीमारियों को भी नियंत्रित करता है।

लाभ:
शरीर में ऊर्जा का संचार होता है
रोग प्रतिकारक क्षमता मजबूत होती है
शारीरिक कष्टों में राहत मिलती है

3. आर्थिक समस्याओं का समाधान
जो लोग आर्थिक संकटों से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए भगवती स्तोत्र का पाठ अत्यधिक प्रभावी होता है। यह स्तोत्र व्यक्ति की समृद्धि की दिशा में सकारात्मक बदलाव लाता है और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करता है।

लाभ:
धन और समृद्धि में वृद्धि होती है
आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है
व्यापार में सफलता प्राप्त होती है

4. मानसिक शांति और मानसिक रोगों से मुक्ति
मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक समस्याओं से राहत पाने के लिए भी भगवती स्तोत्र का पाठ बेहद लाभकारी है। यह स्तोत्र व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्म-संयम प्रदान करता है, जो जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है।

लाभ:
मानसिक शांति प्राप्त होती है
चिंता और अवसाद से छुटकारा मिलता है
आत्मविश्वास में वृद्धि होती है

 भगवती स्तोत्र का सही तरीका से पाठ
भगवती स्तोत्र का पाठ सही विधि से करना जरूरी है, ताकि उसका प्रभाव अधिकतम हो। यहां कुछ बुनियादी निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए आप इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं:
शुद्धता और स्वच्छता का ध्यान रखें – पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और शुद्ध वस्त्र पहनकर पाठ करें।
सुबह या शाम का समय सर्वोत्तम – यह स्तोत्र विशेष रूप से सुबह और शाम के समय पाठ करना उत्तम होता है।
धीरे-धीरे और सही उच्चारण के साथ पाठ करें – शब्दों का उच्चारण सही करें, ताकि उनका प्रभाव सही तरीके से पड़े।
11, 21 या 108 बार पाठ करें – इसे नियमित रूप से पढ़ने से विशेष लाभ होता है।

Share this story

Tags