Samachar Nama
×

ना नींव, ना सहारा... फिर भी 5000 साल से मजबूती से खड़ा है यह शिव मंदिर, वीडियो में जानिए इसका चमत्कारी रहस्य 

ना नींव, ना सहारा... फिर भी 5000 साल से मजबूती से खड़ा है यह शिव मंदिर, वीडियो में जानिए इसका चमत्कारी रहस्य 

राजस्थान में देवी-देवताओं के प्रति लोगों की आस्था और भक्ति के अनगिनत तीर्थ स्थल हैं। कई मंदिरों की अपनी कहानियां भी हैं। जिन्हें लोग सदियों से सुनते आ रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी कोटा के कैथून कस्बे के पास बनियानी गांव में स्थित शिव मंदिर की है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण भूतों ने किया था।

5 हजार साल पुराना इतिहास...
मंदिर के बारे में ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी हमें यही बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भूतों ने किया है। ग्रामीणों ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार उन्होंने भी बचपन में लोगों से सुना है कि करीब 5 हजार साल पहले इस मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था। उनके अनुसार पहले यहां समतल जमीन हुआ करती थी। लेकिन यहां एक रात में मंदिर का निर्माण हुआ था।

मंदिर के द्वार पर उकेरी गई कलाकृतियां...
मंदिर के गर्भगृह में जाने के लिए मुख्य द्वार पर कलाकृतियां उकेरी गई हैं। जो देखने में बेहद मनमोहक लगती हैं। जो अपने आप में इतिहास बयां करती हैं, लेकिन रख-रखाव के अभाव में कई कलाकृतियां क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। इस मंदिर में गांव का एक पुजारी रोजाना शिव की पूजा करता है। गर्भगृह में शिवलिंग स्थित है।

बिना छत वाला मंदिर...

ग्रामीणों ने बताया कि उस समय में दैनिक उपभोग के लिए सुबह-सुबह ही हाथ की चक्की से अनाज पीसा जाता था। जब भूत रात में मंदिर बना रहे थे, तब सुबह चक्की की आवाज सुनकर भूतों ने मंदिर को जितना संभव था उतना बना लिया और चले गए। मंदिर को देखें तो मंदिर की छत नहीं है और मंदिर बिना किसी जोड़ के विशाल पत्थरों पर खड़ा है। मंदिर में बेहतरीन शिल्पकला और कारीगरी देखने को मिलती है। जो उस समय की याद दिलाती है।

मंदिर में कुछ लेख लिखे हुए हैं...
मंदिर में कुछ लिपि में कुछ लेख भी देखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हो चुके हैं और इसकी सुंदर मूर्तियां और कलाकृतियां नष्ट हो चुकी हैं। साथ ही रखरखाव के अभाव में यह मंदिर समय की मार से जीर्ण-शीर्ण भी हो चुका है।

मंदिर के पास सास-बहू ने एक रात में बनवाया तालाब...
मंदिर के पास बने दो तालाबों के बारे में कहा जाता है कि इन तालाबों का निर्माण सास-बहू ने मिलकर किया था। लोगों का कहना है कि पहला तालाब सास ने एक रात में बनवाना शुरू किया था। बड़ा तालाब बन जाने के बाद जब बहू ने दूसरा तालाब बनवाना शुरू किया तो भोर हो गई, इसलिए बहू का तालाब छोटा और गहरा तालाब बन गया।

Share this story

Tags