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Mahabharat Ka Yudha: क्या सिर्फ गौ-हत्या के श्राप के चलते हुई कर्ण की मृत्यु? जाने महाभारत का सबसे बड़ा सच

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कर्म को एक श्राप भगवान् परशुराम से मिला था, जब उसने खुद को ब्राह्मण बताकर उनसे शिक्षा ग्रहण की। परशुराम ने कर्ण से कहा कि जिस पराक्रम को पाने के लिए तुमने छल का सहारा लिया, वह पराक्रम सबसे महत्वपूर्ण समय में तुम्हारे काम नहीं आयेगा। इस श्राप से उदास होकर कर्ण दक्षिण की और गया और तपस्या करने लगा। उसके पास कई दिनों तक खाने के लिए कुछ नहीं था। जब उसे बहुत भूख लगी, तो पहले उसने कुछ केकड़ा पकड़कर खा लिए। इससे उसे पोषण तो मिला, पर उसकी भूख और बढ़ गई।

जब उसे भूख बर्दाश्त नहीं हुआ, तो उसने झाडी में एक जानवर देख और उसे हिरन समझ उसपर तीर चला दिया। पर जब वह करीब गया, तो उसने देखा कि वह तो एक गाय थी। गो-हत्या के भय से वह कांपने लगा। तभी एक ब्राह्मण जो उस गाय का मालिक था, वह आया और अपने गाय को मृत देख विलाप करने लगा। उस ब्राह्मण ने कर्ण को श्राप देते हुए कहा कि 'तुम एक योद्धा लगते हो, इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि रणभूमि में जब तुम बहुत मुश्किल स्थिति में होगे, तब तुम्हारा रथ इतना गहरा धंस जाएगा कि तुम उसे बाहर नहीं निकाल पाओगे। तुम भी इस गाय की भाँति असहाय की स्थिति में मृत्यु को प्राप्त करोगे'।

कर्ण ने ब्राह्मण से माफी माँगते हुए कहा कि 'उसे भूख लगी थी और उससे यह हत्या अनजाने में हो गयी'। वह ब्राह्मण को उस एक गाय के बदले सौ गाय देने की विनती करने लगा, ताकि वह ब्राह्मण अपना श्राप वापस ले ले लेकिन ब्राह्मण ने कर्ण से कहा कि 'ये गाय मेरे लिए बस एक जानवर नहीं थी, बल्कि ये मुझे सबसे अधिक प्रिय थी। तुम्हारे इस विकृत सोच के कारण मैं तुम्हें और भी ज्यादा श्राप देता हूं।’इस प्रकार कर्ण को दोहरा श्राप मिला और इस श्राप के कारण ही वह मरते समय एक पहिया को निकालने में लगा रहा और अर्जुन ने इस क्षण का लाभ उठाकर उसका वध कर दिया। सारे शस्त्र होने के बावजूद, कर्ण इस कठिन परिस्थिति में उनका प्रयोग नहीं कर सका।

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