इसलिए दशानन रावण के थे 10 सिर
हिंदू धर्म में दशहरे के त्योहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता हैं, यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी पर मनाया जाता हैं आठ अक्टूबर यानी आज भारत देश के हर कोने में दशरहे का उत्सव मनाया जा रहा हैं इस दिन प्रभु श्री राम ने रावण का अंत कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं वही हर साल दशहरे पर दस सिर वाले रावण के पुतले को जलाया जाता हैं। मगर आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि रावण के दस सिर किस बात के प्रतीक माने जाते हैं, तो आइए जानते हैं।
बता दें कि दस सिर व बीस भुजाओं वाले रावण न केवल राक्षसों का राजा था बल्कि 6 दर्शन व 4 वेदों के ज्ञाता भी थे। वह अपने समय के सबसे विद्वान व्यक्ति थे। रावण को लोग दशग्रीव, दशानन,दश्कंधन, दशानंद के नाम से भी जानते हैं अपने विद्धान व बुद्धि के कारण लोग रावण दहन से पहले रावण की पूजा कर बच्चों की अच्छी पढ़ाई की भी शुभकामनाएं करते हैं।
वही पुरानी कथाओं के मुताबिक रावण के दस सिर के बारे में बहुत सी कहानियां प्रचलित हैं वही एक काहनी के मुताबिक रावण के दस सिर दस तरह की नकारात्मक प्रवृत्तियों जैसे की काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, घृणा,ईर्ष्या,द्वेष व भय का प्रतीक हैं जिनका रावण के साथ अंत हुआ था।
वही अपने पदनाम, पद या योग्यता को प्यार करते हुए अंहकार को बढ़ावा देना।
अपने परिवार व दोस्तों से अधिक प्यार व मोह रखना।
पश्चाताप करते हुए अपने आदर्श स्वभाव को प्यार करना।
दूसरों को कभी भी बुरा या अच्छा न समझ कर क्रोध या क्रोध के मार्ग पर चलना।
अतीत को प्यार करते हुए नफरत व घृणा के मार्ग पर चलना।
भविष्य के बारे में चिंतित रह कर डर व भय के मार्ग पर चलना। 

