Raksha sutra importance: पूजा पाठ में क्यों बांधा जाता है रक्षा सूत्र, जानिए इसका महत्व
हिंदू धर्म में पूजा पाठ में कई नियमों का पालन किया जाता हैं वही शुभ और मांगलिक कार्यो या पूजा का आयोजन जब भी घर में होता हैं तो उसमें हाथों में रक्षा सूत्र, यानी कलावा बांधा जाता हैं कलाई में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही हैं इसके बारे में पुराणों में भी बताया गया हैं तो आज हम आपको रक्षा सूत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।
मान्यताओं के मुताबिक किसी भी शुभ कार्य के संकल्प के लिए कलाई में रक्षा सूत्र बांधा जाता हैं जीवन में शुभता प्राप्ति के लिए भी रक्षा सूत्र बांधा जाता हैं जब भी कोई नया काम शुरू करते हैं या नई वस्तु खरीदी जाती हैं तो उस समय भी कलावा बांधा जाता हैं कलाई में रक्षा सूत्र बांधने का मतलब रक्षा से भी जुड़ा होता हैं ईश्वर व्यक्ति की रक्षा करें इसलिए भी कलावा बांधते हैं।
पुरुष और अविवाहित कन्या की दाहिनी कलाई और विवाहित महिलाओं की बाईं कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता हैं इसे मंगलवार या शनिवार के दिन बांधना चाहिए। हर व्यक्ति की कलाई में तीन रेखाएं होती हैं इसे मणिबंध कहा जाता हैं इन रेखाओं को शिव, विष्णु और ब्रह्मा कहा जाता हैं इन तीनों रेखाओं में माता शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती का वास होता हैं।
जब भी रक्षा सूत्र कलाई में बांधा जाता हैं तो उसे तीन बार लपेटा जाता हैं रक्षा सूत्र त्रिदेव और तीन देवियों को समर्पित होता हैं मंत्र उच्चारण के साथ रक्षा सूत्र बांधने से ये सभी उस व्यक्ति की रक्षा करते हैं और नकारात्मक शक्तियों से भी बचाव हो जाता हैं।

