जानिए भगवान विष्णु का क्षीरसागर किस जल से बना हुआ है
जयपुर। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं। इसके लिए ब्रह्मवैवर्त पुराण में माना गया है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते है वह क्षीरसागर भगवान श्रीकृष्ण के देश से प्रकट हुआ है, ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला से सृष्टि का विस्तार करते है। सृष्टि का विस्तार करते समय कृष्ण की लीला से ही उनके शरीर में से श्रमजल निकला जिससे ब्रह्माण्ड भर गया।

शास्त्रों में माना गया है कि उस ब्रह्माण्ड के जल में ही राधाजी से एक पुत्र प्रकट हुआ, जिसे महाविष्णु कहा गया। राधाजी से प्रकट हुए पुत्र को राधाजी ने जल में ही अकेला छोड़ दिया जो बाद में श्रीकृष्ण की प्रेरणा से शांत हो कर महाविष्णु बन गये, उसी महाविष्णु को ही विराट पुरुष कहा गया है।

क्षीरसागर के लिए शिवपुराण की एक कथा के अनुसार जब भगवान शिव की आज्ञा से भगवान विष्णु ने कठिन तपस्या करनी शुरु की तो उस समय उनके शरीर में से श्रमजल निकला जिस के कारण वह स्थान पूरी तरह से भर गया। उस जल अर्थात नार में भगवान विष्णु ने शयन किया जिस कारण से उनसे एक नाम नारायण पड़ा। इस कारण से कहा जा सकता है कि भगवान विष्णु जिस क्षीरसागर में निवास करते है वह जल उनके शरीर से निकला हुआ जल है।

भगवान विष्णु के शरीर से निकले श्रमजल को ही क्षीरसागर कहा गया, इसी क्षीरसागर में भगवान विष्णु चातुर्मास के चार महीने विश्राम करते हैं। क्षीरसागर में ही भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। शास्त्रों में इसको लेकर अलग अलग कथाएं हैं लेकिन क्षीरसागर के लिए सब में एक ही बात मिलती है कि यह भगवान विष्णु के श्रमजल से बना है।


