गलता जी मंदिर! वो रहस्यमयी घाटी जहां बंदरों को माना जाता है पवित्र और देवदूत का रूप, वीडियो में जानिए चमत्कारी इतिहास
राजस्थान के गुलाबी शहर जयपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच छिपा एक अनोखा और रहस्यमयी स्थान है- गलता जी मंदिर। यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि आस्था, प्रकृति और रहस्य का अद्भुत संगम है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के बंदरों को महज जीव नहीं, बल्कि देवदूत और पवित्र आत्मा माना जाता है। यहां तक कि स्थानीय लोग उन्हें 'गलता बाबा का सेवक' कहकर सम्मान देते हैं। लेकिन इस घाटी और मंदिर परिसर में ऐसा क्या है, जो इसे भारत के सबसे रहस्यमयी धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है? आइए जानते हैं इसका चमत्कारी इतिहास और इसकी गहराइयों में छिपे रहस्यों के बारे में।
गलता जी मंदिर: एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परिचय
गलता जी मंदिर का इतिहास करीब 500 से 600 साल पुराना है। इसे ऋषि गालव की तपोभूमि माना जाता है, जिन्होंने यहां कठोर तपस्या की थी और गंगा जल को धरती पर लाए थे। मंदिर का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है- 'गलता' जो 'गलव' से बना है। मंदिर परिसर में बने सात पवित्र तालाबों में से एक 'गालव कुंड' के बारे में माना जाता है कि यह गंगाजल को समर्पित है। यहां साल भर पानी बहता रहता है, जबकि इसके आसपास कोई स्थायी जल स्रोत नहीं है। यह तथ्य मंदिर के रहस्य को और भी गहरा करता है।
बंदरों का मंदिर: आस्था या चमत्कार?
गलता जी मंदिर को आम तौर पर 'बंदर मंदिर' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां हजारों बंदर निवास करते हैं। लेकिन इन्हें साधारण बंदर नहीं माना जाता - इस मंदिर में इनका विशेष स्थान है। हिंदू मान्यता के अनुसार, ये हनुमान जी के सेवक हैं और इनके माध्यम से भक्तों की प्रार्थना भगवान तक पहुंचती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर कोई बंदर आपके पास आकर कुछ खा ले या आपसे कुछ छीन ले, तो माना जाता है कि वह प्रसाद के रूप में भगवान तक पहुंच गया है।
एक रहस्यमयी घाटी, जहां समय रुक जाता है
अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित गलता जी मंदिर एक ऐसी घाटी में स्थित है, जहां प्रकृति की शांति और आध्यात्मिकता की ऊर्जा एक साथ महसूस होती है।
यहां की गुफाएं, पत्थरों से गिरता पानी और चारों ओर गूंजती भक्ति की ध्वनि - ये सब मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो मानवीय चेतना को छू जाता है।
कहा जाता है कि यह स्थान एक ऊर्जा केंद्र है, जहां हर साल हजारों साधु-संत ध्यान के लिए आते हैं।
मकर संक्रांति: जब उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
गलता जी मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ मकर संक्रांति के दिन उमड़ती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु कुंडों में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने का प्रयास करते हैं।
यह भी माना जाता है कि इस दिन यहां स्नान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बंदरों को विशेष प्रसाद भी दिया जाता है।
कला और स्थापत्य का संगम
गलता जी मंदिर परिसर में बनी संरचनाएं स्थापत्य की दृष्टि से भी अनूठी हैं। गुलाबी और पीले पत्थरों से बने महलनुमा मंदिर, संकरी पगडंडियों से जुड़ी गुफाएं और कुंडों के किनारे बने प्राचीन चबूतरे - ये सब एक अलग युग का एहसास कराते हैं।
खास तौर पर मुख्य मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई रामायण और महाभारत की घटनाएं भक्तों को आध्यात्मिकता के साथ-साथ संस्कृति की यात्रा पर ले जाती हैं।
रहस्यमयी घटनाएं और अनुभव
मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार बंदरों में अलौकिक व्यवहार देखा गया है।
कुछ लोगों का कहना है कि कुछ बंदर विपत्ति आने से पहले ही असामान्य व्यवहार करने लगते हैं, जैसे उन्हें पहले से ही कोई आभास हो गया हो।
कई भक्तों ने यह भी बताया कि यहां दर्शन के कुछ ही दिनों में उनकी समस्याएं बिना किसी दवा या उपाय के हल हो गईं।

