हर मंत्र, पूजा और साधना से पहले क्यों होता है 'ॐ' का उच्चारण क्या आप जानते है इसका कारण ? जाने पौराणिक और वैज्ञानिक रहस्य
सनातन धर्म में, 'ॐ' को परम ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है। यह सिर्फ़ एक शब्द नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड की आदि ध्वनि है, जिससे पूरी सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। यही कारण है कि किसी भी मंत्र जाप से पहले 'ओम' का उच्चारण करना बहुत ज़रूरी माना जाता है। वेदों और उपनिषदों के गहन अध्ययन से पता चलता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति की ध्वनि 'ओम' तीन अक्षरों—अ, उ, और म—से मिलकर बनी है, जो त्रिमूर्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं: ब्रह्मा (सृष्टि), विष्णु (पालन), और महेश (संहार)।
मंत्रों को शक्ति देने वाला तत्व
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, हर मंत्र की अपनी एक अनोखी ऊर्जा होती है। 'ओम' का जाप उस मंत्र की ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है। यह एक तरह के स्विच की तरह काम करता है जो मंत्र की शक्ति को सक्रिय करता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, 'ओम' एक ऐसी चाबी है जो ब्रह्मांडीय चेतना के दरवाज़े खोलती है, जिससे मंत्र की कंपन हमारे शरीर और आस-पास के वातावरण पर गहरा प्रभाव डालती है।
मन की शांति और एकाग्रता
'ॐ' का जाप मन को शांत और स्थिर करने में मदद करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से, यह ध्वनि हमें बाहरी दुनिया से अलग करती है और हमें आंतरिक शांति की ओर ले जाती है। जब हम 'ओम' के साथ किसी मंत्र का जाप शुरू करते हैं, तो हमारा मन आसानी से एकाग्र हो जाता है, जिससे मंत्र का प्रभाव और भी गहरा होता है।
'ॐ' जाप से जुड़े मुख्य लाभ:
यह ध्वनि हमें सीधे सृष्टि की आदि ऊर्जा से जोड़ती है।
'ओम' का जाप मंत्रों की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।
यह मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
इसकी कंपन तनाव को कम करती है और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ावा देती है।

