प्रतिदिन करे श्रीगणेश के इस चमत्कारी और रहस्यमयी मंत्र का जाप घर पर कभी नहीं होगा भूतों का साया, वीडियो में जाने विधि
भारतीय संस्कृति में गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और शुभ आरंभ के देवता के रूप में जाना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या यात्रा की शुरुआत श्री गणेश के स्मरण से ही होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘गणेश अष्टकम’ नामक एक विशेष स्तोत्र न केवल सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करता है, बल्कि जीवन में आने वाली अदृश्य नकारात्मक शक्तियों — जैसे भूत-प्रेत बाधाओं, टोना-टोटका, मानसिक तनाव और भय — से भी रक्षा करता है?गणेश अष्टकम’ संस्कृत भाषा में रचित आठ श्लोकों का एक प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना आदिशंकराचार्य ने की थी। इसका पाठ करते समय उच्चारण में कंपन (vibration) उत्पन्न होता है, जो वैज्ञानिक रूप से भी मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने में सहायक होता है।
क्या है गणेश अष्टकम?
‘अष्टक’ का अर्थ होता है आठ — यानी आठ श्लोकों से मिलकर बना यह स्तोत्र भगवान गणेश की महिमा का गान है। इसमें उनकी रूप-रचना, गुण, शक्ति, और भक्तों के प्रति कृपा को विस्तार से वर्णित किया गया है। शास्त्रों में माना गया है कि इस अष्टकम का नियमित पाठ करने से विघ्नों का नाश होता है और जीवन में स्थायित्व व शुभता आती है।इसमें भगवान गणेश की एकाग्रता, मेधा, और बुद्धि को विकसित करने वाले रूप की स्तुति की गई है। विशेषकर विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति कैसे?
पुराणों और तंत्र ग्रंथों में वर्णित है कि भगवान गणेश 'प्रेतबाधा निवारक' भी हैं। जिन स्थानों या व्यक्तियों पर नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव हो, वहां गणेश अष्टकम का पाठ विशेष लाभदायक होता है। इसके पीछे एक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण भी है।
आध्यात्मिक दृष्टि से: गणपति का एक नाम ‘भूतनायक’ भी है, जो भूत-प्रेतों पर शासन करने वाले के रूप में वर्णित है। उन्हें तांत्रिक बाधाओं के निवारण हेतु सर्वोत्तम देवता माना गया है।
वैज्ञानिक दृष्टि से: जब कोई व्यक्ति इस स्तोत्र का श्रद्धा पूर्वक पाठ करता है, तो उसका मन एकाग्र होता है। उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें मस्तिष्क की न्यूरल वेव्स को संतुलित करती हैं और डर, भ्रम या अनजाने भय जैसी मानसिक स्थितियों को कम करती हैं। यही कारण है कि प्रेतबाधा या नकारात्मकता से पीड़ित व्यक्ति को इसका पाठ करने की सलाह दी जाती है।
सुख और समृद्धि में कैसे सहायक?
गणेश जी की कृपा से सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। जो व्यक्ति नियमित रूप से गणेश अष्टकम का पाठ करता है, उसके जीवन में बाधाएं स्वतः कम होती जाती हैं, और नए अवसरों के द्वार खुलते हैं। विशेषकर जब यह पाठ प्रातः काल या गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी अथवा बुधवार को किया जाए, तब इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
अष्टकम में वर्णित है कि गणेश जी की उपासना से ना केवल सांसारिक सुख-संपत्ति प्राप्त होती है, बल्कि आत्मिक शांति और संतुलन भी प्राप्त होता है, जो किसी भी व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए अनिवार्य है।
कैसे करें गणेश अष्टकम का पाठ?
सुबह स्नान करके साफ स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
श्रद्धा और विश्वास से आठों श्लोकों का उच्चारण करें।
पाठ के अंत में गणपति से अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।
यदि पाठ स्वयं करने में कठिनाई हो तो किसी ज्ञानी व्यक्ति या ऑनलाइन ऑडियो के साथ भी इसका अभ्यास किया जा सकता है।
किन्हें विशेष रूप से करना चाहिए?
जिनके जीवन में बार-बार विघ्न, रुकावट या हानि होती है।
विद्यार्थियों को एकाग्रता और सफलता के लिए।
व्यापारियों को व्यापार में वृद्धि के लिए।
जिनके ऊपर तंत्र-मंत्र या नकारात्मक ऊर्जा का संदेह हो।
मानसिक तनाव या भय से ग्रस्त लोगों को।
निष्कर्ष
‘गणेश अष्टकम’ कोई साधारण स्तोत्र नहीं है — यह एक दिव्य औषधि के समान है जो केवल भक्ति नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी लाभकारी है। यह न केवल जीवन में आने वाले विघ्नों को दूर करता है, बल्कि अदृश्य मानसिक और आध्यात्मिक संकटों से भी रक्षा करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव से ग्रस्त इस समय में ऐसे स्तोत्रों का अभ्यास मन और आत्मा दोनों को शक्ति प्रदान करता है।
तो अगली बार जब जीवन में अनचाही रुकावटें आएं, मन विचलित हो, या कोई नकारात्मक अनुभव हो — तो श्रद्धा से गणेश अष्टकम का पाठ करें। यह केवल धर्म नहीं, जीवन को संबल देने वाला आध्यात्मिक विज्ञान है।

