जानिए, कौन हैं भैरव और क्या है इनकी उपासना का महत्व
तंत्र साधना में विशेष रूप से शिव की तंत्र साधना में भैरव जी का विशेष महत्व होता हैं। भैरव वैसे तो भगवान शिव के ही रौद्र रूप हैं। लेकिन कहीं-कहीं पर इनको शिव का पुत्र भी माना जाता हैं। कही पर यह भी कहा जाता हैं, कि जो कोई भी शिव के मार्ग पर चलता
तंत्र साधना में विशेष रूप से शिव की तंत्र साधना में भैरव जी का विशेष महत्व होता हैं। भैरव वैसे तो भगवान शिव के ही रौद्र रूप हैं। लेकिन कहीं-कहीं पर इनको शिव का पुत्र भी माना जाता हैं। कही पर यह भी कहा जाता हैं, कि जो कोई भी शिव के मार्ग पर चलता हैं, उसे भैरव कहा जाता हैं। 
वही इनकी उपासना से भय और अवसाद का भी नाश हो जाता हैं। व्यक्ति को अदम्य साहस मिल जाता हैं। शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति के लिए भैरव की पूजा अचूक मानी जाती हैं। शत्रु और विरोधियों को शांत करने के लिए राशि के मुताबिक ही इनकी पूजा अवश्य ही करनी चाहिए।
राशि के अनुसार पूजा—
- मेष राशि—मेष राशि के लोग भगवान भैरव को हरे फल का भोग लगाएं।
- वृषभ राशि— भगवान भैरव को दूध से बनी हुई मिठाइयों का भोग लगाएं।
- मिथुन राशि— भगवान भैरव को लाल फूल अर्पित करें।
- कर्क राशि— भगवान भैरव को पीला वस्त्र अर्पित करें।
- सिंह राशि— भगवान भैरव को उरद के बड़ों का भोग लगाएं।
- कन्या राशि— भगवान भैरव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलांए।
- तुला राशि— भगवान भैरव को पीले फल का भाग लगाएं।
- वृश्चिक राशि— भगवान भैरव को गुड़ या फिर गुड़ की बनी हुई मिठाई का भोग लगाएं।
- धनु राशि— भगवान भैरव को दूध या फिर दूध से बनी हुई मिठाई का भोग लगाएं।
- मकर राशि— भगवान भैरव को हरे फल का भोग लगाएं।
- कुम्भ राशि— भगवान भैरव को सुगंध अर्पित करें।
- मीन राशि— भगवान भैरव को लाल वस्त्र अर्पित करें।


