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सूरज के सबसे करीब मौजूद ग्रह बुध का घट रहा है आकार! जानें पृथ्वी पर इसका क्या पड़ेगा असर

सूरज के सबसे करीब मौजूद ग्रह बुध का घट रहा है आकार! जानें पृथ्वी पर इसका क्या पड़ेगा असर

सूरज के सबसे करीब मौजूद ग्रह बुध (Mercury) को लेकर वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाली जानकारी सामने रखी है। नई रिसर्च के मुताबिक, बुध ग्रह समय के साथ लगातार सिकुड़ रहा है। इसकी सतह पर दिखाई देने वाली लंबी-लंबी चट्टानी संरचनाएं और उभार इस बात के संकेत देती हैं कि कभी यह ग्रह आज की तुलना में बड़ा हुआ करता था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों सालों में जैसे-जैसे बुध के अंदर की गर्मी कम हुई, उसका अंदरूनी हिस्सा सिकुड़ने लगा। इसी प्रक्रिया के कारण ग्रह की बाहरी सतह पर भी दबाव पड़ा और वहां झुर्रियों जैसी संरचनाएं बन गईं।

बुध की सतह पर दिखती हैं सिकुड़न की निशानियां

बुध की सतह कई जगहों पर फटी हुई और ऊबड़-खाबड़ नजर आती है। वैज्ञानिक इन चट्टानी उभारों को सिकुड़ने से बनी संरचनाओं के तौर पर देखते हैं। इनमें से कुछ चट्टानी किनारे करीब 1 मील यानी 1.6 किलोमीटर तक ऊंचे हो सकते हैं और सैकड़ों किलोमीटर तक फैले हुए हैं।

इन संरचनाओं को देखकर वैज्ञानिकों को अंदाजा होता है कि ग्रह के अंदर लंबे समय से बदलाव चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुध के सिकुड़ने की प्रक्रिया को समझना सिर्फ इस ग्रह के लिए ही नहीं, बल्कि पथरीले ग्रहों के निर्माण और विकास को समझने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

4.5 अरब साल पहले बना था बुध

नासा के मुताबिक, बुध हमारे सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह है और सूर्य से औसतन करीब 5.8 करोड़ किलोमीटर दूर है। यह महज 88 दिनों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी कर लेता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, बुध का निर्माण करीब 4.5 अरब साल पहले गैस और धूल से हुआ था। सौर मंडल के शुरुआती दौर में ग्रहों का निर्माण बेहद उथल-पुथल भरा था। उस समय अंतरिक्ष में मौजूद चट्टानी पिंड एक-दूसरे से लगातार टकराते थे।

नए बने ग्रहों के अंदर पहले से ही जबरदस्त गर्मी थी। इन टक्करों से निकलने वाली ऊर्जा ने ग्रहों को और गर्म किया। लेकिन समय बीतने के साथ जब ग्रहों ने अपनी आंतरिक गर्मी खोनी शुरू की तो उनके अंदरूनी हिस्से सिकुड़ने लगे।

नई रिसर्च में सामने आया बड़ा अनुमान

Geophysical Research Letters में प्रकाशित नई स्टडी के मुताबिक, बुध के सिकुड़ने की वास्तविक मात्रा पहले लगाए गए अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों सालों में बुध की सतह पर हुए उल्कापिंडों के हमलों से बने गड्ढों और मलबे ने उसकी कई सिकुड़न वाली संरचनाओं को ढक दिया। इसी वजह से अब तक वैज्ञानिक ग्रह के सिकुड़ने की पूरी तस्वीर नहीं समझ पाए थे।

स्टडी के प्रमुख लेखक और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के प्लेनेटरी साइंटिस्ट गाकू निशियामा के मुताबिक, बुध के सिकुड़ने की दर का पता लगाना ग्रह के विकास और उसके रहस्यमयी आंतरिक हिस्से को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पहले के अनुमान से 10 से 30 फीसदी ज्यादा सिकुड़ सकता है बुध

रिसर्च टीम ने अनुमान लगाया है कि अगर उल्कापिंडों से आया मलबा बुध की सतह पर बनी संरचनाओं को नहीं ढकता, तो वैज्ञानिक ग्रह के सिकुड़ने का कहीं ज्यादा सटीक अनुमान लगा सकते थे।

गणनाओं के मुताबिक, बुध शायद पहले के अनुमान से 10 से 30 फीसदी ज्यादा सिकुड़ा हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके कारण ग्रह की त्रिज्या में करीब 11.6 किलोमीटर तक का बदलाव आया हो सकता है।

पहले की रिसर्च में बुध की त्रिज्या में लगभग 1 से 2 किलोमीटर से लेकर करीब 7 किलोमीटर तक बदलाव का अनुमान लगाया गया था।

सिकुड़न से खुलेंगे बुध के अंदर के राज

बुध कितना सिकुड़ा है, यह पता चलने से वैज्ञानिकों को उसके अंदर मौजूद कोर और ग्रह के ठंडा होने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर बुध के सिकुड़ने की मात्रा ज्यादा है तो इसका मतलब यह हो सकता है कि ग्रह का धातु वाला कोर अपेक्षाकृत बड़ा है, उसके कोर में सिलिकॉन जैसे हल्के तत्व कम हैं या ग्रह के शुरुआती दौर में उसका तापमान अनुमान से कहीं ज्यादा रहा होगा।

यानी बुध की सतह पर दिखाई देने वाली ये 'झुर्रियां' वास्तव में ग्रह के अरबों साल पुराने इतिहास का रिकॉर्ड हो सकती हैं।

बेपीकोलंबो मिशन से मिलेगी नई जानकारी

बुध को समझने के लिए यूरोप और जापान का बेपीकोलंबो मिशन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लंबे सफर के बाद यह मिशन बुध के करीब पहुंच चुका है और इसके जरिए वैज्ञानिक ग्रह की सतह और संरचना का और ज्यादा विस्तृत अध्ययन करने की तैयारी में हैं।

मिशन से मिलने वाले टोपोग्राफी डेटा की मदद से वैज्ञानिक बुध की सतह पर मौजूद चट्टानों, गड्ढों और सिकुड़न से बनी संरचनाओं का पहले से कहीं ज्यादा सटीक अध्ययन कर पाएंगे।

इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि आखिर अरबों सालों के दौरान बुध कितना ठंडा हुआ, कितना सिकुड़ा और उसके अंदर आज भी क्या रहस्य छिपे हुए हैं।

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