Samachar Nama
×

साइंस की दुनिया का सबसे बड़ा चमत्कार! चेरनोबिल के खतरनाक रेडिएशन के बीच कैसे ज़िंदा बचे 31 घोड़े? जानें हैरान करने वाला सच

साइंस की दुनिया का सबसे बड़ा चमत्कार! चेरनोबिल के खतरनाक रेडिएशन के बीच कैसे ज़िंदा बचे 31 घोड़े? जानें हैरान करने वाला सच

करीब 40 साल पहले हुए परमाणु हादसे के बाद वीरान पड़े चेरनोबिल में प्रकृति की अनोखी वापसी देखने को मिल रही है। यूक्रेन के इस प्रतिबंधित क्षेत्र में दुर्लभ प्रजेवाल्स्की जंगली घोड़े न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि उनकी आबादी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। जिस इलाके को कभी रेडिएशन के कारण इंसानों के लिए खतरनाक माना गया, वहां इन घोड़ों ने अपना नया ठिकाना बना लिया है।

1986 की परमाणु दुर्घटना के बाद शुरू हुई नई कहानी

अप्रैल 1986 में तत्कालीन सोवियत संघ के चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में भीषण दुर्घटना हुई थी। इस हादसे के बाद रेडिएशन फैलने से आसपास के बड़े इलाके को खाली कराना पड़ा। इंसानों के साथ-साथ स्थानीय वन्यजीवों पर भी इसका असर पड़ा।हालांकि, समय के साथ इस प्रतिबंधित क्षेत्र में दुर्लभ प्रजेवाल्स्की घोड़ों ने अपनी मौजूदगी मजबूत की। वर्ष 1998 में इन जंगली घोड़ों को यहां बसाने के लिए एक संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य इलाके की जैव-विविधता को बढ़ावा देना और घोड़ों के लिए प्राकृतिक आवास तैयार करना था।

31 घोड़ों से शुरू हुआ संरक्षण अभियान

शोध के मुताबिक, 1998 और 1999 के दौरान कुल 31 प्रजेवाल्स्की घोड़ों को चेरनोबिल क्षेत्र में लाया गया था। इनमें ज्यादातर घोड़े अस्कानिया नोवा बायोस्फीयर रिजर्व से आए थे, जबकि तीन नर घोड़ों को एक स्थानीय चिड़ियाघर से लाया गया था।शुरुआत आसान नहीं रही। यहां पहुंचने के कुछ समय बाद ही आठ घोड़ों की मौत हो गई। इसके बावजूद बचे हुए घोड़ों ने प्रजनन किया और उनकी आबादी बढ़ने लगी। वर्ष 2003-2004 तक इनकी संख्या करीब 65 हो गई थी।लेकिन आगे चलकर झुंड को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अक्टूबर 2007 तक इनकी संख्या घटकर लगभग 30 से 40 रह गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन मौतों के कारणों का पता चला, उनमें 70 प्रतिशत से अधिक का संबंध अवैध शिकार से था।

कैमरा ट्रैप से सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

घोड़ों की वास्तविक संख्या का पता लगाना आसान नहीं है, क्योंकि वे घने जंगलों और खुले मैदानों में घूमते रहते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने कैमरा ट्रैप की मदद ली।

सर्गी गाशचक और सर्गी पास्केविच के अध्ययन में 2018 के दौरान चेरनोबिल के यूक्रेनी हिस्से में 137 प्रजेवाल्स्की घोड़े दर्ज किए गए। इनमें 47 नर, 66 मादाएं और युवा मादाएं तथा 24 बच्चे शामिल थे।

शोधकर्ताओं ने लगभग 2,600 वर्ग किलोमीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में से 720 वर्ग किलोमीटर हिस्से का सर्वे किया था। ऐसे में संभावना जताई गई कि इस इलाके में घोड़ों की वास्तविक संख्या दर्ज आंकड़े से अधिक हो सकती है।

मुश्किल हालात में भी जारी रहा प्रजनन

अध्ययन के मुताबिक, 2007 में झुंड की संख्या घटने के बावजूद बाद के वर्षों में घोड़ों ने फिर से अपनी आबादी बढ़ाई। कुछ घोड़े प्रिप्याट नदी पार कर दूसरे इलाके में चले गए और वहां एक नया प्रजनन समूह बना लिया।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 2009 से 2018 के बीच आबादी बढ़ने की रफ्तार शुरुआती वर्षों की तुलना में कम रही। झुंड में कम उम्र और प्रजनन की क्षमता रखने वाली मादाओं के अनुपात में भी बदलाव देखा गया।

क्या चेरनोबिल अब इन घोड़ों का सुरक्षित घर है?

प्रजेवाल्स्की घोड़े दुनिया की दुर्लभ जंगली घोड़ा प्रजातियों में शामिल हैं। चेरनोबिल में उनकी आबादी का बढ़ना संरक्षण के लिहाज से एक अहम संकेत है। यह दिखाता है कि उचित परिस्थितियों में एक छोटा झुंड भी समय के साथ अपनी संख्या बढ़ा सकता है।हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चेरनोबिल का पूरा इलाका रेडिएशन से मुक्त या पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। घोड़ों की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र में वन्यजीवों की अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है, लेकिन उनके स्वास्थ्य और आबादी पर लंबे समय तक निगरानी रखना अब भी जरूरी है।

चेरनोबिल की यह कहानी बताती है कि भीषण आपदा के बाद भी प्रकृति कुछ परिस्थितियों में वापसी कर सकती है। कभी तबाही के प्रतीक रहे इस इलाके में दुर्लभ जंगली घोड़ों की बढ़ती संख्या वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन और संरक्षण की एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गई है।

Share this story

Tags