Samachar Nama
×

चांद पर जंग का रहस्य सुलझा! पृथ्वी की मैग्नेटोटेल ने निभाई अहम भूमिका
 

चांद पर जंग का रहस्य सुलझा! पृथ्वी की मैग्नेटोटेल ने निभाई अहम भूमिका


चांद को लंबे समय से एक ऐसी जगह माना जाता रहा है जहां पृथ्वी की तरह जंग लगने की संभावना बेहद कम है। इसकी वजह है कि चांद पर लगभग कोई वायुमंडल नहीं है और न ही सतह पर बहता हुआ पानी मौजूद है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों को चांद के ध्रुवीय इलाकों में हेमेटाइट के संकेत मिले हैं। हेमेटाइट एक तरह का आयरन ऑक्साइड है, जिसे आमतौर पर लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया से जोड़ा जाता है।

इस खोज ने वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर ऐसे वातावरण में चांद पर लोहे का ऑक्सीकरण कैसे हुआ?

चंद्रयान-1 के डेटा से मिला सुराग

साल 2020 में वैज्ञानिकों ने भारत के चंद्रयान-1 मिशन से मिले डेटा का अध्ययन करते हुए चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों में हेमेटाइट के प्रमाण पाए। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि चांद पर पृथ्वी जैसी ऑक्सीजन और नमी वाली परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं।

पृथ्वी पर लोहे में जंग लगने के लिए आमतौर पर ऑक्सीजन और पानी या नमी की जरूरत होती है। चांद पर इन दोनों की उपलब्धता बेहद सीमित होने के कारण हेमेटाइट की मौजूदगी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बन गई।

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र दे सकता है ऑक्सीजन

वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझाने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की ओर ध्यान दिया। पृथ्वी के चारों ओर मौजूद मैग्नेटोस्फीयर सौर हवा के साथ संपर्क करके एक लंबी पूंछ जैसी संरचना बनाता है, जिसे मैग्नेटोटेल कहा जाता है।

चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए समय-समय पर इस मैग्नेटोटेल से होकर गुजरता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल से निकलने वाले ऑक्सीजन आयन इस चुंबकीय क्षेत्र के साथ चांद तक पहुंच सकते हैं।

यही ऑक्सीजन चांद की सतह पर मौजूद लोहे के ऑक्सीकरण में भूमिका निभा सकती है।

ध्रुवों पर मौजूद पानी की बर्फ भी अहम

चांद पर भले ही नदियां और झीलें नहीं हैं, लेकिन इसके ध्रुवीय क्षेत्रों में हमेशा छाया में रहने वाले कई गड्ढों के अंदर पानी की बर्फ मौजूद है। इन इलाकों में सूर्य की रोशनी बेहद कम पहुंचती है, जिसके कारण बर्फ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पानी की बर्फ चांद की सतह पर मौजूद लोहे और पृथ्वी से आए ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सौर हवा क्यों बनती है बड़ी बाधा?

इस पूरी प्रक्रिया में सूर्य से आने वाली सौर हवा भी महत्वपूर्ण है। इसमें बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन मौजूद होता है। हाइड्रोजन ऑक्सीकरण को रोकने वाला यानी रिड्यूसिंग एजेंट की तरह काम कर सकता है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में सौर हवा की मौजूदगी चांद पर हेमेटाइट बनने की प्रक्रिया को मुश्किल बना सकती है।

लेकिन जब चांद पृथ्वी की मैग्नेटोटेल के अंदर पहुंचता है, तो उसे कुछ समय के लिए सौर हवा के प्रभाव से सुरक्षा मिलती है।

पृथ्वी और चांद का अनोखा कनेक्शन

मैग्नेटोटेल के भीतर पहुंचने पर चांद की सतह तक आने वाले हाइड्रोजन की मात्रा कम हो सकती है, जबकि पृथ्वी के वायुमंडल से आए ऑक्सीजन आयन वहां पहुंच सकते हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों में मौजूद पानी की बर्फ के साथ मिलकर ये परिस्थितियां लोहे के ऑक्सीकरण और हेमेटाइट बनने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकती हैं।इस तरह चांद पर मिली 'जंग' की पहेली का एक संभावित जवाब पृथ्वी का वायुमंडल, उसका चुंबकीय क्षेत्र और चांद पर मौजूद पानी की बर्फ—इन तीनों के अनोखे संबंध में छिपा हो सकता है।
 

Share this story

Tags