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ज़्यादा वज़न की 'बली' चढ़ा रोबोट: इंसानों की तरह थका और सीधे जजों के पैरों में जा गिरा

ज़्यादा वज़न की 'बली' चढ़ा रोबोट: इंसानों की तरह थका और सीधे जजों के पैरों में जा गिरा

चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित World Humanoid Robot Games 2026 में रोबोट्स की तकनीकी क्षमता के साथ उनकी सीमाएं भी सामने आ रही हैं। सोमवार को वेटलिफ्टिंग मुकाबले के दौरान एक ह्यूमनॉइड रोबोट वजन उठाने की कोशिश में अपना संतुलन खो बैठा और लड़खड़ाते हुए सीधे जजों की टेबल की ओर जा गिरा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में शुरुआती वजन 15 किलो रखा गया था। एक रोबोट ने बारबेल उठाने की कोशिश की, लेकिन वजन ऊपर ले जाते समय उसका बैलेंस बिगड़ गया। कुछ ही सेकेंड में रोबोट अनियंत्रित होकर जजों की दिशा में गिर पड़ा। इसके बाद अधिकारियों ने तुरंत मुकाबला रोक दिया और उस प्रयास को असफल घोषित कर दिया।

इस प्रतियोगिता में कुल चार ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने हिस्सा लिया। वेटलिफ्टिंग में सिर्फ ताकत ही मायने नहीं रखती, बल्कि रोबोट के लिए शरीर का संतुलन, पैरों की स्थिति, हाथों का नियंत्रण और वजन के साथ पूरे शरीर का तालमेल बनाए रखना भी बेहद जरूरी होता है। यही वजह है कि यह मुकाबला रोबोट्स की वास्तविक क्षमता का अहम टेस्ट माना जा रहा है।

World Humanoid Robot Games 2026 का दूसरा संस्करण 22 से 26 अगस्त तक बीजिंग के National Speed Skating Oval (Ice Ribbon) में आयोजित किया जा रहा है। इस बार 16 देशों की 666 टीमों के 2,056 रोबोट 51 अलग-अलग इवेंट्स में हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, फुटबॉल, जिम्नास्टिक, मार्शल आर्ट्स और वेटलिफ्टिंग के अलावा ऐसे मुकाबले भी शामिल हैं, जिनके जरिए रोबोट्स की वास्तविक दुनिया में काम करने की क्षमता को परखा जा रहा है।

इस गेम्स में कुछ दिन पहले Tiangong Ultra ने 100 मीटर की रेस महज 9.39 सेकेंड में पूरी कर सुर्खियां बटोरी थीं। यह समय इंसानों के 100 मीटर के वर्ल्ड रिकॉर्ड 9.58 सेकेंड से कम है, जिसे उसैन बोल्ट ने बनाया था। हालांकि, रोबोट का यह समय आधिकारिक मानव एथलेटिक्स रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों अलग-अलग कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते हैं।

वेटलिफ्टिंग की यह घटना एक अहम बात साफ करती है—रोबोट्स कुछ खास क्षेत्रों में इंसानों से तेज और सक्षम साबित हो रहे हैं, लेकिन बैलेंस, बॉडी कंट्रोल और अचानक बदलती परिस्थितियों में स्थिरता बनाए रखना अभी भी उनके लिए बड़ी चुनौती है। यही चुनौतियां दिखाती हैं कि ह्यूमनॉइड रोबोट तकनीक अभी विकास के एक बेहद दिलचस्प दौर से गुजर रही है।

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