PAK PM शहबाज को नजर आ रहा सोना ही सोना! डॉलर कमाने की फिराक में पाकिस्तान ने चल दी एक और नापाक चाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी गिरती हुई इकॉनमी को बचाने के लिए बलूचिस्तान को बेच रहा है और उसने पहले ही कीमती रेको डिक खदान को दूसरे देशों को सौंपने का प्लान फाइनल कर लिया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों के डर से, शहबाज शरीफ सरकार ने अब एक नई चाल चली है। पाकिस्तानी सरकार ने अमेरिका और कनाडा को खुश करने के लिए बलूचिस्तान में एक 'स्पेशल फोर्स' तैनात करने और अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने का फैसला किया है। हालात तब और बिगड़ गए जब कनाडाई कंपनी बैरिक गोल्ड कॉर्पोरेशन ने पाकिस्तान को अल्टीमेटम दिया।
BLA हमलों से बढ़ा डर
कनाडाई कंपनी ने साफ तौर पर कहा कि वह तुरंत मल्टी-बिलियन डॉलर के रेको डिक प्रोजेक्ट की सिक्योरिटी रिव्यू शुरू करेगी। हाल ही में, BLA के भीषण हमलों में 36 आम नागरिक और 22 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन हमलों से विदेशी इन्वेस्टर्स में डर बैठ गया है, जिन्हें चिंता है कि बलूचिस्तान में चल रहे संघर्ष में उनका पैसा डूब जाएगा और उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल ही में प्रोजेक्ट वॉल्ट के तहत रेको डिक में $1.3 बिलियन के इन्वेस्टमेंट की घोषणा की थी। यह बड़ी रकम कैश की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। डॉलर की इस आमद के बीच, BLA न सिर्फ मजबूती से खड़ा है, बल्कि पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर भी हमला कर रहा है। BLA ने साफ कर दिया है कि बलूचिस्तान के संसाधनों के शोषण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बलूचिस्तान सरकार की बड़ी घोषणा
दूसरी ओर, इन्वेस्टर्स को भरोसा दिलाने के लिए, बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के सलाहकार शाहिद रिंद ने अरब न्यूज़ को बताया कि सरकार अब निर्णायक मूड में है। खनिज से भरपूर इलाकों को सुरक्षित करने के लिए एक अलग फ्रंटियर कॉर्प्स बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान और अफगानिस्तान के साथ सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी ताकि विद्रोहियों को घुसने से रोका जा सके। इसके अलावा, इंटेलिजेंस नेटवर्क को और भी मजबूत किया जाएगा।
रेको डिक से सोना कब निकलेगा?
रेको डिक को दुनिया की सबसे बड़ी तांबे और सोने की खदानों में से एक माना जाता है। इस प्रोजेक्ट में बैरिक गोल्ड की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि पाकिस्तानी सरकार और बलूचिस्तान प्रांतीय सरकार की 25-25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उम्मीद है कि 2028 तक सोने का खनन शुरू हो जाएगा। जहां पाकिस्तान इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट मानता है जो उसकी किस्मत बदल देगा, वहीं बलूच लोग इसे अपनी मातृभूमि की लूट मानते हैं।

