अंतरिक्ष से आ सकती है तबाही! वैज्ञानिकों ने की 40,000 नियर-अर्थ एस्टेरॉयड की पहचान; जारी की चेतावनी
अंतरिक्ष में मौजूद विशाल चट्टानों को लेकर वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं। अब पृथ्वी के करीब मौजूद एस्टेरॉयड यानी क्षुद्रग्रहों की संख्या 40 हजार के आंकड़े को पार कर गई है। इन अंतरिक्ष चट्टानों में कुछ इतने बड़े हैं कि अगर भविष्य में उनकी कक्षा पृथ्वी से टकराने वाली दिशा में आती है तो भारी नुकसान हो सकता है।हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये 40 हजार एस्टेरॉयड धरती से टकराने वाले हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर की कक्षाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है और आने वाले लंबे समय में पृथ्वी से टकराने की वास्तविक संभावना बेहद कम है।
आखिर वैज्ञानिकों को चिंता क्यों है?
पृथ्वी के नजदीक आने वाले एस्टेरॉयड को Near-Earth Asteroids यानी NEA कहा जाता है। ये ऐसे क्षुद्रग्रह हैं जिनकी कक्षाएं उन्हें पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब ला सकती हैं।ये चट्टानी या धातु से बने पिंड हैं, जो अरबों साल पहले सौर मंडल के निर्माण के समय बचे हुए अवशेष माने जाते हैं। इनमें से ज्यादातर मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद मुख्य एस्टेरॉयड बेल्ट में पाए जाते हैं, लेकिन कुछ की कक्षाएं उन्हें पृथ्वी के करीब ले आती हैं।यही वजह है कि वैज्ञानिक इनकी स्थिति, आकार, गति और कक्षा पर लगातार नजर रखते हैं।
40 हजार का आंकड़ा क्यों है अहम?
पृथ्वी के पास मौजूद एस्टेरॉयड की खोज पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सदी की शुरुआत में ज्ञात Near-Earth Asteroids की संख्या करीब एक हजार थी।
इसके बाद 2016 तक यह आंकड़ा लगभग 15 हजार पहुंचा और 2022 में करीब 30 हजार हो गया। अब ज्ञात NEA की संख्या करीब 40 हजार तक पहुंच चुकी है।
इसका एक बड़ा कारण आधुनिक टेलीस्कोप और बेहतर तकनीक है। वैज्ञानिक जितनी बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, उतनी ही ज्यादा अंतरिक्ष चट्टानों की पहचान हो रही है।
क्या 2 हजार एस्टेरॉयड धरती से टकरा सकते हैं?
रिपोर्ट में करीब 2 हजार ऐसे एस्टेरॉयड का जिक्र किया गया है जिनकी कक्षाओं को संभावित रूप से पृथ्वी के लिए निगरानी योग्य माना जाता है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है। किसी एस्टेरॉयड को संभावित रूप से खतरनाक श्रेणी में रखना और उसके वास्तव में पृथ्वी से टकराने की पुष्टि होना दो अलग-अलग बातें हैं।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, अगले 100 वर्षों में ज्ञात संभावित खतरनाक एस्टेरॉयडों में से किसी के पृथ्वी से टकराने की संभावना बेहद कम है।
बड़े एस्टेरॉयड से कितना नुकसान हो सकता है?
एस्टेरॉयड का आकार कुछ फीट से लेकर कई मील तक हो सकता है। छोटे एस्टेरॉयड वायुमंडल में प्रवेश करते समय टूट सकते हैं, जबकि बड़े पिंड अगर पृथ्वी की सतह तक पहुंचें तो भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।
विशेषज्ञों की नजर खास तौर पर मध्यम आकार के एस्टेरॉयड पर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 300 से 900 फीट आकार वाली अंतरिक्ष चट्टानों को खोजना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इनका आकार बहुत बड़े एस्टेरॉयड जितना नहीं होता, लेकिन किसी आबादी वाले क्षेत्र के पास टक्कर होने पर इनसे क्षेत्रीय स्तर पर गंभीर नुकसान हो सकता है।
क्या सभी बड़े एस्टेरॉयड खोज लिए गए हैं?
वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े और आसानी से दिखाई देने वाले ज्यादातर खतरनाक एस्टेरॉयडों की पहचान हो चुकी है और उन पर निगरानी रखी जा रही है।
अब चुनौती छोटे और मध्यम आकार के उन एस्टेरॉयडों को खोजने की है, जो अपेक्षाकृत कम चमकीले होते हैं और उनकी पहचान करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, 300 से 900 फीट आकार वाले एस्टेरॉयडों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी खोजा जाना बाकी है।
आगे और बढ़ेगी एस्टेरॉयड की संख्या
जैसे-जैसे नई पीढ़ी के शक्तिशाली टेलीस्कोप और सर्वे सिस्टम काम करना शुरू करेंगे, वैज्ञानिकों को और भी ज्यादा Near-Earth Asteroids मिलने की उम्मीद है।
इसका मतलब यह नहीं है कि पृथ्वी पर खतरा अचानक बढ़ गया है। बल्कि इसका मतलब यह भी है कि वैज्ञानिक अब पहले के मुकाबले अंतरिक्ष में मौजूद संभावित खतरों को ज्यादा अच्छी तरह पहचान और ट्रैक कर पा रहे हैं।
पहली बार कब मिला था ऐसा एस्टेरॉयड?
पृथ्वी के करीब आने वाले शुरुआती ज्ञात एस्टेरॉयडों में 433 Eros का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इसे 1898 में जर्मन खगोलशास्त्री कार्ल गुस्ताव विट ने बर्लिन की यूरानिया वेधशाला से खोजा था।
इसके बाद से वैज्ञानिकों ने हजारों Near-Earth Objects की पहचान की है और लगातार उनकी कक्षाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
धरती पर तबाही कब होगी?
फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है कि इन 40 हजार एस्टेरॉयडों में से कोई जल्द ही पृथ्वी से टकराकर वैश्विक तबाही मचाने वाला है। वैज्ञानिकों की असली चिंता भविष्य में संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना है।
यानी एस्टेरॉयड की संख्या का 40 हजार तक पहुंचना अपने आप में 'धरती पर तबाही आने' का संकेत नहीं है। यह अंतरिक्ष निगरानी में हुई बड़ी प्रगति भी दिखाता है। वैज्ञानिक जितने ज्यादा एस्टेरॉयड खोजेंगे, उतना ही बेहतर तरीके से उनकी कक्षाओं का अध्ययन और संभावित जोखिम का आकलन किया जा सकेगा।

