महासागर के नीचे मिला अनोखा खजाना, सोने से भी कीमती लेकिन इंसान इसे छू तक नहीं सकता, जानें वजह
सोचिए आपके सामने सोने का एक बड़ा भंडार हो, फिर भी आप उसे देख या छू न पाएं! जापान के समुद्र से ऐसा ही एक अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर की गहराइयों में सोने का एक विशाल भंडार खोजा है। हालांकि, सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सोना पूरी तरह से 'अदृश्य' है। जापानी जलक्षेत्र में मिला यह सोना एक ऐसा खजाना है जो वहां मौजूद होने के बावजूद नंगी आंखों से दिखाई नहीं देता। जहां इस खोज ने टेक और माइनिंग सेक्टर में उत्साह पैदा किया है, वहीं इसने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी है, जिसके कारण फिलहाल इस खजाने को निकालना असंभव लग रहा है।
वैज्ञानिकों ने जापान के पास प्रशांत महासागर की गहराइयों में सोने के इस भंडार का पता लगाया है। उनका दावा है कि समुद्र के नीचे इस तरह के भंडारों में अदृश्य सोने की यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण खोज है। यह पूरा इलाका पानी के नीचे सक्रिय ज्वालामुखी वाला क्षेत्र है। जहां इस खोज ने टेक और माइनिंग कंपनियों में उम्मीदें जगाई हैं, वहीं इसने पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
यह अदृश्य सोना क्या है?
*साइंटिफिक रिपोर्ट्स* जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, यह सोना आम सोने की तरह चमकता नहीं है। इसे नंगी आंखों या सामान्य माइक्रोस्कोप से भी नहीं देखा जा सकता। असल में, यह सोना पाइराइट नाम के खनिज के अंदर समाया हुआ है। पाइराइट को अक्सर "फूल्स गोल्ड" (मूर्खों का सोना) कहा जाता है क्योंकि यह असली सोने जैसा दिखता है लेकिन असल में सोना नहीं होता। हालांकि, इस मामले में असली सोना इस "फूल्स गोल्ड" के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में एटम और नैनोपार्टिकल के रूप में फंसा हुआ है। वैज्ञानिकों ने SIMS नाम की एक एडवांस्ड लेबोरेटरी तकनीक का इस्तेमाल करके इस छिपे हुए सोने की खोज की।
यह खजाना कहां से आया?
यह खोज जापान के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन के भीतर, टोक्यो से लगभग 350 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हिगाशी-आओगाशिमा हाइड्रोथर्मल फील्ड में की गई। यह इलाका पानी के नीचे सक्रिय ज्वालामुखी क्रेटर के भीतर स्थित है। यहां समुद्र की सतह पर ऐसे वेंट (छिद्र) पाए जाते हैं जिनसे गर्म और खनिजों से भरपूर पानी निकलता है। जब यह उबलता हुआ पानी समुद्र के ठंडे पानी के संपर्क में आता है, तो खनिज जम जाते हैं और चिमनी जैसी संरचनाएं बनाते हैं। इस प्रक्रिया के कारण इलाके में तांबा, जस्ता, चांदी और सोना जमा हो गया है।
माइनिंग क्यों रुकी हुई है?
हालांकि यह इलाका गहरे समुद्र की अन्य जगहों की तुलना में कम गहरा है, फिर भी यहां से सोना निकालना फिलहाल असंभव माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि "फूल्स गोल्ड" (नकली सोने) के अंदर एटॉमिक लेवल पर छिपे असली सोने को अलग करने के लिए बहुत एडवांस्ड और महंगी प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की ज़रूरत होती है। अभी दुनिया में ऐसी कोई कमर्शियल टेक्नोलॉजी नहीं है जो समुद्र की तलहटी से इस अदृश्य सोने को इतने बड़े पैमाने पर बिना ज़्यादा नुकसान पहुँचाए निकाल सके।
पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा
तकनीकी चुनौतियों के अलावा, पर्यावरण से जुड़ी एक बड़ी चिंता भी है। समुद्र की गहराई में मौजूद इन हाइड्रोथर्मल वेंट्स के आस-पास एक अनोखा और प्राचीन इकोसिस्टम पनपता है। इस इलाके में ट्यूब वर्म्स, केकड़े, गहरे समुद्र के कोरल, स्पंज और एक अनोखा ऑक्टोपस जैसे जीव रहते हैं - जो कहीं और जीवित नहीं रह सकते। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर यहाँ माइनिंग का काम शुरू हुआ, तो यह पूरा इकोसिस्टम नष्ट हो जाएगा।

