Xi Jinping India Visit: शी जिनपिंग के दौरे पर कांग्रेस का बयान- 'जब तक सीमा विवाद नहीं सुलझता, रिश्ते आगे बढ़ना मुश्किल'
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंच गए हैं। शी जिनपिंग का विमान दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। उनके भारत पहुंचने के बीच कांग्रेस की ओर से भारत-चीन संबंधों और सीमा विवाद को लेकर प्रतिक्रिया सामने आई है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि अगर भारत और चीन अपने रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहते हैं, तो दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े सीमा विवाद का समाधान बेहद जरूरी है। इसके लिए दोनों देशों को गंभीर, व्यावहारिक और ठोस प्रयास करने होंगे।
‘सीमा विवाद का समाधान जरूरी’
मनीष तिवारी ने भारत और चीन को एशिया की दो प्रमुख शक्तियां बताते हुए कहा कि दोनों देशों को मिलकर यह विचार करना चाहिए कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े क्षेत्रीय विवाद को सुलझाने के लिए कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए चल रही विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives) प्रक्रिया की धीमी प्रगति पर भी सवाल उठाया। तिवारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में अब तक उस स्तर की प्रगति नहीं हुई है, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
उन्होंने हाल में बीजिंग में हुई बैठक के बाद जारी बयान का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि बयान से संकेत मिलता है कि सीमा विवाद के समाधान के तरीकों और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है।
चीन ने कई देशों के साथ सुलझाए सीमा विवाद- तिवारी
कांग्रेस सांसद ने कहा कि चीन की करीब 12 देशों के साथ जमीनी सीमाएं हैं और उसने इनमें से कई देशों के साथ सीमा संबंधी विवादों को सुलझाया है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में चीन ने अपनी शुरुआती क्षेत्रीय मांगों के मुकाबले समझौते भी किए हैं।
तिवारी ने भूटान के साथ चल रही सीमा वार्ता का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे में भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भी गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।
‘भारत और चीन एशिया की प्रमुख शक्तियां’
मनीष तिवारी ने कहा कि भारत और चीन दोनों एशिया की महत्वपूर्ण शक्तियां हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का समाधान सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और वैश्विक मुद्दों पर बड़ी भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं, तो सीमा विवाद के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी होगा।
BRICS के बदलते स्वरूप पर भी उठाए सवाल
मनीष तिवारी ने BRICS के विस्तार और बदलते स्वरूप को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुए पहले BRICS शिखर सम्मेलन से लेकर दिल्ली में हो रहे 18वें शिखर सम्मेलन तक संगठन ने लंबा सफर तय किया है।
हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि BRICS के विस्तार के बाद क्या इसे अभी भी उसी तरह ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधि मंच माना जा सकता है।
उन्होंने चीन की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि चीन दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कई अत्याधुनिक औद्योगिक तकनीकों में उसकी मजबूत स्थिति है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि चीन को मौजूदा स्वरूप में ग्लोबल साउथ का हिस्सा किस हद तक माना जाना चाहिए।
तिवारी ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के BRICS से जुड़ने के संदर्भ में भी संगठन की बदलती भूमिका पर सवाल उठाए।
ऐसे में शी जिनपिंग के भारत दौरे और BRICS शिखर सम्मेलन के बीच भारत-चीन संबंध, LAC विवाद और BRICS के बदलते स्वरूप पर कांग्रेस की यह टिप्पणी राजनीतिक और कूटनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

