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    किराना हिल्स में क्यों उठा था धुआं? पूर्व CDS अनिल चौहान ने किया बड़ा खुलासा
 

	किराना हिल्स में क्यों उठा था धुआं? पूर्व CDS अनिल चौहान ने किया बड़ा खुलासा


 पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने स्पष्ट किया है कि मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के सरगोधा स्थित किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था। उन्होंने कहा कि सरगोधा क्षेत्र में भेजे गए आत्मघाती ड्रोन में से कोई एक अपनी उड़ान क्षमता खोने के बाद किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो सकता है।

‘ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात’ विषय पर चर्चा के दौरान जनरल चौहान ने एयर मार्शल ए.के. भारती के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया था।

किराना हिल्स को लेकर क्या बोले जनरल चौहान?

जनरल चौहान ने कहा कि किराना हिल्स को लेकर बार-बार सवाल उठाए गए, क्योंकि पाकिस्तान के इस इलाके को उसके कथित परमाणु प्रतिष्ठानों से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि एयर मार्शल भारती ने सही कहा था कि भारतीय सेनाओं ने इस स्थान को लक्ष्य नहीं बनाया था।उन्होंने बताया कि ऑपरेशन से पहले भारतीय सेनाओं ने सरगोधा और उसके आसपास के इलाकों में कई ड्रोन भेजे थे। इनका उद्देश्य वहां मौजूद रडार और अन्य सैन्य ठिकानों की पहचान करना था।जनरल चौहान के मुताबिक, इन ड्रोन की उड़ान क्षमता सीमित समय तक होती है। यदि उन्हें निर्धारित समय में कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो वे नीचे गिर सकते हैं। उन्होंने संभावना जताई कि ऐसा ही कोई ड्रोन किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो और इसी वजह से वहां धुआं दिखाई दिया हो।

एयर मार्शल ए.के. भारती ने क्या कहा था?

12 मई 2025 को तत्कालीन वायु संचालन महानिदेशक (DG Air Operations) एयर मार्शल ए.के. भारती से किराना हिल्स पर कथित हमले को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि भारतीय वायुसेना ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया।एयर मार्शल भारती 31 जुलाई को उप वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनके बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर किराना हिल्स को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहे।

29 अप्रैल की बैठक में तय हुई थी रणनीति

जनरल चौहान ने बताया कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की रणनीति पर कई स्तरों पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि 23 से 29 अप्रैल के बीच चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ कई बैठकें हुईं। इन बैठकों में सैन्य कार्रवाई के अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया गया।29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में ऑपरेशन के लिए प्रमुख फैसले लिए गए। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे।जनरल चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया था कि पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए और कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिसमें विफलता की कोई गुंजाइश न रहे। साथ ही, भारत के पास कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत होने चाहिए।

बहावलपुर को भी बनाया गया था लक्ष्य

पूर्व CDS ने बताया कि 29 अप्रैल की बैठक में बहावलपुर को भी संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री के जोर देने पर इसे सूची में जोड़ा गया, क्योंकि प्रधानमंत्री ने बड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया था।

उन्होंने यह भी बताया कि रात में अभियान चलाने का एक प्रमुख कारण आम नागरिकों को होने वाले संभावित नुकसान को न्यूनतम रखना था।

मई 2025 में हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। भारत के अनुसार, इस कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए।

जनरल अनिल चौहान की ताजा टिप्पणी किराना हिल्स को लेकर चल रहे दावों पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण के तौर पर सामने आई है। उनके मुताबिक, किराना हिल्स पर किसी नियोजित भारतीय हमले के बजाय वहां दिखाई दिए नुकसान या धुएं की एक संभावित वजह ड्रोन का दुर्घटनाग्रस्त होना हो सकती है।
 

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