Voter List Update: चुनाव आयोग का 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SSR का निर्देश, 2027 के चुनाव से पहले वोटर लिस्ट होगी अपडेट
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे, मौजूदा रिकॉर्ड में गलतियां सुधारी जाएंगी और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर निगरानी रखी जाएगी।
इस सूची में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्य शामिल हैं, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
SSR में नए वोटर जुड़ सकेंगे, गलतियां भी होंगी ठीक
चुनाव आयोग के मुताबिक, SSR का उद्देश्य मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करना है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। इसके तहत नए नाम दर्ज करने, गलत जानकारी में सुधार करने और नियमानुसार नाम हटाने से जुड़े आवेदन लिए जाएंगे।
2027 में 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं को भी मतदाता बनने के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। इसके लिए 1 जनवरी के साथ-साथ 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 की पात्रता तिथियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर रहेगी विशेष निगरानी
आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में अतिरिक्त जांच के निर्देश दिए हैं। आदेश के मुताबिक, यदि किसी मतदान केंद्र पर 2 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की स्थिति बनती है, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को स्वयं जांच करनी होगी।
इसी तरह, यदि कोई व्यक्ति एक साथ पांच से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराता है, तो भी अधिकारी को मामले की जांच करनी होगी।
आयोग ने नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। दावों और आपत्तियों की भौतिक सूची राजनीतिक दलों को हर सप्ताह उपलब्ध कराई जाएगी। बैठकों की कार्यवाही और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी रिकॉर्ड में रखे जाएंगे।
SIR में छूटे नामों को जोड़ने के लिए क्या करना होगा?
SSR के आदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं हो पाने वाले लोगों के लिए अलग प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ऐसे पात्र व्यक्ति नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज देने होंगे। केवल फॉर्म भरने से नाम अपने आप मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा। संबंधित ERO दस्तावेजों और पात्रता की जांच के बाद नाम जोड़ने पर फैसला करेगा।
मतदान केंद्रों की संख्या और स्थान की भी होगी समीक्षा
चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या और उनकी लोकेशन की समीक्षा करने को कहा है। सामान्य तौर पर एक मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए। नए मतदान केंद्र बनाने के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी होगी।
मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने में सुविधा हो, इसके लिए यह भी देखा जाएगा कि उन्हें सामान्य परिस्थितियों में दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय न करनी पड़े। हाईराइज इमारतों, आवासीय कॉलोनियों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में सर्वे करके जरूरत के अनुसार नए केंद्रों का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी प्रस्ताव भेजेंगे और मौजूदा तथा प्रस्तावित मतदान केंद्रों की जगह का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा।
चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को लेकर निर्देश
SSR के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), ERO, सहायक ERO और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने संबंधित पद खाली नहीं रखने पर जोर दिया है। आदेश के अनुसार, CEO, DEO, ERO और AERO के तबादले के लिए आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी। तबादला जरूरी होने पर कारणों के साथ प्रस्ताव भेजना होगा।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन से जुड़े अधिकारी इस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण और निगरानी में काम करेंगे।
इसके अलावा, मतदाता सूची में पते एक तय प्रारूप में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मतदाता के घर और संबंधित मतदान क्षेत्र की पहचान करना आसान हो सके।
2027 में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों पर नजर
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा होगा।
इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। ऐसे में SSR के जरिए मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने और मौजूदा रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बाकी राज्यों में कार्यक्रम बाद में घोषित होगा
आयोग के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना में SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा।
SIR को लेकर क्यों जारी है विवाद?
बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची को लेकर विवाद तेज हुआ था। चुनाव आयोग ने इसे सूची को दुरुस्त करने और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने की प्रक्रिया बताया, जबकि विपक्ष ने दस्तावेजों की शर्तों और समयसीमा पर सवाल उठाए।
बिहार की प्रारंभिक मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम बाहर होने की खबरों के बाद विवाद और बढ़ा। विपक्ष ने आशंका जताई कि प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम भी हट सकते हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और मतदाता सूची संशोधन को लेकर आयोग की शक्तियों तथा अपनाई जा रही प्रक्रिया पर बहस जारी रही।
SSR और SIR अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। SSR नियमित रूप से मतदाता सूची अपडेट करने पर केंद्रित है, जबकि SIR विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। नए आदेश के तहत पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, रिकॉर्ड में सुधार करने और नाम हटाने के मामलों की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जरूरी तथ्य-सुधार: प्रकाशित खबरों के अनुसार, SSR के लिए घोषित 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सूची में राजस्थान, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। वहीं, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड इस घोषित सूची में नहीं हैं। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है।

