Samachar Nama
×

UPI Charge: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% MDR, संजय निषाद ने उठाए सवाल; जानें नए नियम
 

UPI Charge: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% MDR, संजय निषाद ने उठाए सवाल; जानें नए नियम

UPI Charge: यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किए जाने के फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे शुल्क से आम लोगों और ग्राहकों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि किन परिस्थितियों में इस तरह का चार्ज बढ़ाया गया है।
हालांकि, नए नियम में एक अहम बात यह है कि MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला चार्ज नहीं है। वित्त मंत्रालय के अनुसार ग्राहक को UPI से पेमेंट करने पर अलग से MDR नहीं देना होगा। यह शुल्क मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लागू होगा।


15 अक्टूबर से लागू होगा नया UPI नियम
NPCI के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।
उदाहरण के तौर पर 3,000 रुपये के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% की दर से MDR 12 रुपये बनता है। हालांकि यह राशि ग्राहक से सीधे लेने का नियम नहीं है।
₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR
नए फ्रेमवर्क में 2,000 रुपये तक के मर्चेंट UPI पेमेंट को MDR से बाहर रखा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी राशि के लिए MDR नहीं लगेगा।
यानी दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को UPI के जरिए पैसे भेजने पर इस नए नियम का असर नहीं पड़ेगा।
छोटे व्यापारियों को भी राहत
छोटे कारोबारियों को भी नए MDR से राहत दी गई है। जिन छोटे मर्चेंट्स को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त होते हैं, उन्हें MDR से छूट दी जाएगी। सरकार के अनुसार इससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का असर कम रखने का प्रयास किया गया है।


कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और ईंधन जैसे आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर फ्लैट 5 रुपये MDR का प्रावधान किया गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉक ब्रोकर से जुड़े पेमेंट पर 0.02% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
सरकार ने बताया क्यों जरूरी है MDR?
वित्त मंत्रालय के अनुसार MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रोवाइडर्स जैसे हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के संचालन, विस्तार और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी सुविधाओं को बनाए रखना है।
सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M UPI ट्रांजैक्शन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि कम राशि वाले और निर्धारित श्रेणियों के लेनदेन को इससे बाहर रखा गया है।
संजय निषाद ने क्या कहा?
मंत्री संजय निषाद ने नए चार्ज को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि महंगाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच इस तरह के शुल्क का असर आम जनता पर पड़ सकता है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल किया कि किन परिस्थितियों में शुल्क बढ़ाने का फैसला किया गया।
इस तरह नए UPI फ्रेमवर्क में ग्राहक से सीधे चार्ज लेने की व्यवस्था नहीं है, लेकिन 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने से व्यापारियों के भुगतान लागत ढांचे में बदलाव आएगा। इसका अंतिम असर कारोबारियों की कीमतों और भुगतान व्यवहार पर किस तरह पड़ता है, यह आगे देखने वाली बात होगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। UPI शुल्क से जुड़े नियमों में बदलाव संभव है, इसलिए किसी भुगतान या व्यावसायिक निर्णय से पहले NPCI और संबंधित बैंक/पेमेंट सर्विस की ताजा जानकारी जरूर देखें।
 

Share this story

Tags