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स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार: 'संवैधानिक मर्यादाएं तार-तार कर रही है पार्टी, देश कभी माफ नहीं करेगा'

स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार: 'संवैधानिक मर्यादाएं तार-तार कर रही है पार्टी, देश कभी माफ नहीं करेगा'

कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चर्चा के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं और आयोग के खिलाफ अपनी आपत्तियां सामने रखी हैं।

इसी के बाद बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। बीजेपी महासचिव स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी को चुनावी नतीजों की समीक्षा करने के बजाय संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने से बचना चाहिए।

स्मृति ईरानी ने मतदाता सूची में डुप्लीकेट और मृत लोगों के नाम को लेकर भी कांग्रेस से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि अगर वोटर लिस्ट में किसी मृत व्यक्ति का नाम या एक ही व्यक्ति के कई नाम दर्ज हैं, तो ऐसे नामों को हटाने की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों की जा रही है।

दरअसल, SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता नामों की समीक्षा की जा रही है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना और डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के रिकॉर्ड को हटाना चुनावी सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

BLO की भूमिका पर भी स्मृति ईरानी का बयान

स्मृति ईरानी ने कहा कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड को लेकर नोटिस या दस्तावेजों की जरूरत है, उनके मामलों में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO की भूमिका तय की गई है। चुनाव आयोग ने भी SIR प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों और नोटिस से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण जारी किए हैं।

इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। कांग्रेस ने आयोग से पारदर्शिता और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर जवाबदेही की मांग की है, जबकि बीजेपी आयोग का बचाव कर रही है।

2019 के बयान का भी किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्मृति ईरानी ने 2019 के राजनीतिक घटनाक्रम और कांग्रेस नेतृत्व के पुराने बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाते समय लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग देश की चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना है।

कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

फिलहाल चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। कांग्रेस इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर अनावश्यक सवाल खड़े कर रहा है।

वहीं, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को लेकर अपने स्तर पर स्पष्टीकरण दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक आयोग ने कहा है कि संबंधित फैसले आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए गए। इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़ी याचिकाएं पहुंच चुकी हैं।यानी आने वाले दिनों में चुनाव आयोग, SIR और वोटर लिस्ट का मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी चर्चा में रहने वाला है।

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