'घुसपैठियों के साथ खड़े हैं राहुल गांधी': अमित शाह ने साधा निशाना, कहा- संसद/विधानसभा में SIR पर चर्चा से क्यों डर रही कांग्रेस?
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस SIR का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रही है। शाह ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस को चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा है, तो वह संसद या विधानसभा में इस मुद्दे पर खुली चर्चा से पीछे क्यों हट रही है?
5 नवंबर 2026 को हरियाणा के करनाल में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा से जुड़ी सभा में अमित शाह ने राहुल गांधी को बहस की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार SIR पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। शाह ने राहुल गांधी से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विशेष सत्र बुलाने की मांग करने को कहा।
‘SIR, EVM और घुसपैठियों पर चर्चा के लिए तैयार सरकार’
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि राहुल गांधी लगातार वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं, लेकिन जब संसद में इन मुद्दों पर चर्चा की बात आती है तो विपक्ष सदन की कार्यवाही बाधित करता है। शाह ने कहा कि सरकार SIR, EVM और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं सहित सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि वे संसद में आएं और इन मुद्दों पर तथ्यों के साथ चर्चा करें।
राहुल गांधी पर घुसपैठियों को बचाने का आरोप
अमित शाह ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर आरोप लगाया कि वे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का विरोध इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इससे कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के ‘वोट बचाओ’ अभियान पर तंज कसते हुए इसे ‘घुसपैठिया बचाओ’ अभियान बताया।
शाह ने दावा किया कि SIR के दौरान हटाए गए नामों को लेकर विपक्ष गलत आंकड़े पेश कर रहा है। हैदराबाद में 2 नवंबर को दिए गए अपने बयान में उन्होंने करीब 13 करोड़ नामों के विवाद पर आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो दूसरी जगह चले गए थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जिनकी एक से अधिक प्रविष्टियां थीं। उन्होंने करीब तीन करोड़ प्रविष्टियों को ऐसे लोगों से जुड़ा बताया, जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था और उन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया करार दिया।
हालांकि, ये आंकड़े और घुसपैठियों से जुड़ा दावा अमित शाह का राजनीतिक बयान है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
कांग्रेस ने भी सरकार से पूछे सवाल
अमित शाह के आरोपों के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि अगर सरकार को SIR की प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है, तो विपक्ष के सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा?
खड़गे ने अमित शाह के करीब तीन करोड़ घुसपैठियों वाले दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि गृह मंत्री के इतने वर्षों के कार्यकाल में अवैध घुसपैठ रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। कांग्रेस का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर गंभीर सवाल हैं और चुनाव आयोग को इनका जवाब देना चाहिए।
आखिर SIR को लेकर क्यों आमने-सामने हैं BJP और कांग्रेस?
SIR यानी Special Intensive Revision चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों, डुप्लीकेट प्रविष्टियों और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच की जाती है।
बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची से अपात्र नाम हटाना निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है। वहीं कांग्रेस और INDIA गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटाए जा सकते हैं। विपक्ष चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
संसद में चर्चा से सुलझेगा विवाद या बढ़ेगी सियासी लड़ाई?
SIR को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी अब संसद के विशेष सत्र की मांग तक पहुंच गई है। अमित शाह का कहना है कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि कांग्रेस चुनाव आयोग और सरकार से पहले अपने आरोपों पर जवाब मांग रही है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार वास्तव में SIR पर चर्चा के लिए विशेष संसद सत्र बुलाएगी? क्या राहुल गांधी और विपक्षी दल इस बहस में शामिल होंगे? फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और गर्मा सकता है।

