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दिल्ली से देहरादून तक गरमाई सियासत: CEC के खिलाफ सड़कों पर उतरी कांग्रेस, पुलिस से धक्का-मुक्की के बीच दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

दिल्ली से देहरादून तक गरमाई सियासत: CEC के खिलाफ सड़कों पर उतरी कांग्रेस, पुलिस से धक्का-मुक्की के बीच दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध शुक्रवार को देशभर में देखने को मिला। कांग्रेस ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कई राज्यों में प्रदर्शन किया। दिल्ली, पटना, लखनऊ, देहरादून, चंडीगढ़, गुवाहाटी और कोलकाता समेत कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। कुछ जगहों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि पटना और चंडीगढ़ में वाटर कैनन का इस्तेमाल किए जाने की खबर है।

देहरादून से पटना तक प्रदर्शन

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। वहीं पटना में चुनाव आयोग के कार्यालय के घेराव के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। लखनऊ में भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। गुवाहाटी में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत की भी रिपोर्ट है।

SIR को लेकर क्या है विवाद?

विवाद का केंद्र चुनावी मतदाता सूचियों का Special Intensive Revision यानी SIR है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से करीब 13 करोड़ नामों का आंकड़ा लगातार उठाया जा रहा है।हालांकि, यह आंकड़ा राजनीतिक आरोप और विवाद का हिस्सा है। SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में नामों की जांच, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चल रही है। इसलिए हर हटाए गए नाम को स्थायी रूप से मताधिकार से बाहर होना मानना सही नहीं होगा।

चुनाव आयोग के अंदर भी उठे सवाल

विवाद उस समय और बढ़ गया जब The Indian Express की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल थे।दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि इस तरह की आपत्तियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR समेत अंतिम फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। इसलिए दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है। याचिका में कथित तौर पर ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को चुनौती दी गई है जिन्हें याचिकाकर्ता ने आयोग के बहुमत की सहमति के बिना लिया गया बताया है।याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे की जांच के लिए SIT या न्यायिक जांच की मांग भी की गई है। याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी गई है। यह फिलहाल याचिकाकर्ता की मांग है, अदालत का अंतिम फैसला नहीं।

48 घंटे का अल्टीमेटम और आंदोलन की चेतावनी

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने दावा किया कि उसने 48 घंटे की डेडलाइन दी है और इस्तीफा नहीं होने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

मामला अब राजनीतिक टकराव से आगे बढ़ा

SIR को लेकर विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों पर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों का बचाव कर रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों ने पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और SIR से जुड़े अंतिम आंकड़ों से यह साफ होगा कि विवाद में उठाए गए आरोपों और दावों पर कानूनी तथा संस्थागत स्तर पर क्या स्थिति बनती है।

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