P. Chidambaram: CBI-ED को और ताकत देने के बजाय जरूरी है निगरानी, बोले- ‘पिंजरे का तोता भी बन सकता है पिटबुल’
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने CBI और ED को और ज्यादा अधिकार देने के विचार पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अतिरिक्त शक्तियां देने से ज्यादा जरूरी उनके कामकाज की प्रभावी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
चिदंबरम ने ये बातें इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद की किताब ‘Policing the Republic’ के लॉन्च के दौरान आयोजित एक पैनल चर्चा में कहीं।
‘निगरानी नहीं होगी तो पिंजरे का तोता बन सकता है पिटबुल’
पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सवाल पर चिदंबरम ने जांच एजेंसियों और पुलिस व्यवस्था में निगरानी की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में SHO से लेकर DGP तक एक स्पष्ट हैरारकी होती है।
उन्होंने CBI का उदाहरण देते हुए कहा कि एजेंसी में कई बेहतरीन अधिकारी काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या राज्यों से डेपुटेशन पर आने वाले अधिकारियों की होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो अधिकारी राज्य में अच्छा काम करता है, वह केंद्र में आकर खराब अधिकारी क्यों बन जाता है।
इसी संदर्भ में चिदंबरम ने कहा कि निगरानी और देखरेख की कमी होने पर पिंजरे में बंद तोता भी कभी-कभी पिटबुल बन सकता है।
राजनीतिक दखल की संभावना से नहीं किया इनकार
चिदंबरम ने पुलिस और जांच एजेंसियों के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि राज्य और संभवत: केंद्र स्तर पर भी राजनीतिक दखल की गुंजाइश हो सकती है।
हालांकि, उनके मुताबिक अधिकारियों को संगठन के अनुशासन का पालन करते हुए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
‘CBI और ED ने कानूनी अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया’
चिदंबरम ने यशोवर्धन आजाद की उस राय से असहमति जताई, जिसमें CBI और ED को और ज्यादा अधिकार देने की बात कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों एजेंसियों ने कई मौकों पर अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर काम किया है।
उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी हो गई है कि ये एजेंसियां कई बार ‘खुद ही कानून बन गई हैं।’
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में INX Media मामले में CBI ने चिदंबरम को गिरफ्तार किया था। इसी मामले का संदर्भ देते हुए भी उनके CBI और ED के कामकाज पर सवाल उठाने को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों को नेताओं के सामने क्यों नहीं डटना चाहिए?
पूर्व गृह मंत्री ने IAS और IPS अधिकारियों के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को नेताओं के सामने अपनी बात रखने से डरना नहीं चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि अगर किसी अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी निभाने की वजह से नुकसान उठाना भी पड़े तो अधिकतम उसका तबादला हो सकता है। उनके मुताबिक, अधिकारियों को अपने कर्तव्य और संस्थागत जिम्मेदारी के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
CBI-ED के लिए बाहरी निगरानी की वकालत
चिदंबरम ने कहा कि CBI और ED के कामकाज पर बाहरी निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां FBI और दूसरी जांच एजेंसियों पर विधायी निगरानी की व्यवस्था है।
उनके मुताबिक, स्वतंत्र निगरानी से जांच एजेंसियों की शक्तियों के इस्तेमाल में जवाबदेही और संतुलन कायम किया जा सकता है।
NIA के प्रावधान का दिया उदाहरण
चिदंबरम ने National Investigation Agency Act, 2008 में हुए एक संशोधन का भी उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इसमें एक ऐसा प्रावधान पेश किया गया था, जिसके तहत NIA की चार्जशीट को दो अधिकारियों के स्वतंत्र पैनल से गुजरना था।
इस पैनल में हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शामिल करने का प्रावधान था।
चिदंबरम के मुताबिक, जांच एजेंसियों को ज्यादा शक्तियां देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उन शक्तियों के इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था भी मौजूद हो।

