चुनावी धांधली के दावों पर विपक्ष का बड़ा कदम: खड़गे के घर जुटीं 19 पार्टियां, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जनमहाभियोग की तैयारी
देश में कथित चुनावी धांधली और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध तेज करते हुए शनिवार, 31 अक्टूबर को दिल्ली में ‘जनमहाभियोग’ का सांकेतिक कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की है। इस कार्यक्रम में करीब 21 विपक्षी दलों के शामिल होने की उम्मीद है।इससे पहले गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं की अहम बैठक हुई थी। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग ने इन मामलों में उचित कार्रवाई नहीं की। हालांकि, ये आरोप विवादित हैं और चुनाव आयोग ने कुछ आरोपों को खारिज किया है।
खड़गे करेंगे प्रस्ताव पेश, राहुल गांधी देंगे अंतिम भाषण
कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर आयोजित करने की योजना है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इसके संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी, जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सांकेतिक प्रस्ताव पेश करेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समापन भाषण देंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में करीब 30 वक्ता अपनी बात रख सकते हैं।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह विपक्ष की ओर से आयोजित एक सांकेतिक राजनीतिक कार्यक्रम है। इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी रूप से पद से हटाया नहीं जा सकता। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें हटाने के लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के गंभीर आरोप
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष इन मामलों की जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भी चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए, ताकि मतदाताओं की चिंताओं को सामने लाया जा सके।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में SIR से संबंधित आरोपों का खंडन किया है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच टकराव जारी है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली
INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने की भी योजना बनाई है। इस रैली के जरिए विपक्ष कथित ‘वोट चोरी’, मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को जनता के बीच उठाएगा।
राहुल गांधी ने लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बता रहा है।
बीजेपी ने भी तैयार की जवाबी रणनीति
विपक्ष के आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी जवाबी रणनीति तेज कर दी है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव में हार के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। पार्टी ने विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक स्तर पर जवाब देने के लिए अभियान चलाने की तैयारी की है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्षी नेताओं को चुनावी गड़बड़ी के आरोप संसद में उठाने की चुनौती दी है। इस तरह चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा अब सरकार और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल विपक्ष का मुख्य जोर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपने आरोपों को सार्वजनिक मंच पर उठाने और 1 नवंबर की रैली के जरिए राजनीतिक दबाव बढ़ाने पर है। वहीं, चुनाव आयोग अपने जवाब में आरोपों को चुनौती दे रहा है।अब देखना होगा कि विपक्ष का यह अभियान चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को कितना प्रभावित करता है और SIR से जुड़े विवादों पर आगे क्या कानूनी व राजनीतिक कदम उठाए जाते हैं।

