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Modi 3.0 Cabinet: मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल के संकेत! हरदीप पुरी और बीएल वर्मा हटे तो खाली होंगी 5 मंत्रालयों की कुर्सियां

Modi 3.0 Cabinet: मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल के संकेत! हरदीप पुरी और बीएल वर्मा हटे तो खाली होंगी 5 मंत्रालयों की कुर्सियां

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जल्द ही बड़े स्तर पर मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। खास बात यह है कि इस सूची में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम शामिल नहीं है।

दोनों नेता फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में उनके सामने अब राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ मंत्री पद को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा की सदस्यता खत्म होने के बाद क्या होगा?

संवैधानिक प्रावधानों के तहत कोई व्यक्ति सांसद न रहते हुए भी अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर बना रह सकता है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में अगले छह महीनों के भीतर भाजपा के लिए राज्यसभा की नई सीट हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा है।

इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि अगर हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा जाता है, तो क्या दोनों मोदी मंत्रिपरिषद में बने रहेंगे या फिर उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया जाएगा।

मोदी मंत्रिपरिषद में खाली हो सकते हैं कई मंत्री पद

मौजूदा परिस्थितियों को देखें तो मोदी मंत्रिपरिषद में करीब पांच पद खाली होने की स्थिति बन सकती है। धर्मेंद्र प्रधान पहले ही शिक्षा मंत्री के पद से हट चुके हैं। वहीं राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू के मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की बात सामने आई है।

इसके अलावा परिवहन राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का कोषाध्यक्ष भी बनाया गया है। ऐसे में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत यह भी चर्चा है कि वह आगे मंत्री पद पर बने रहेंगे या संगठन की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसी महीने हो सकता है मंत्रिपरिषद में फेरबदल

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मोदी मंत्रिपरिषद में इसी महीने फेरबदल हो सकता है। इससे पहले सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।

संभावना जताई जा रही है कि नवरात्रि के समाप्त होने के बाद तीन दिनों का विशेष संसद सत्र आयोजित किया जा सकता है। इसके तुरंत बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल होने की अटकलें हैं।

हरदीप सिंह पुरी की जगह पंजाब से आ सकता है नया सिख चेहरा

पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए पहले चर्चा थी कि हरदीप सिंह पुरी को दोबारा राज्यसभा भेजा जा सकता है। वह मोदी सरकार में फिलहाल प्रमुख सिख चेहरों में शामिल हैं।

लेकिन राज्यसभा उम्मीदवारों की नई सूची में उनका नाम नहीं होने के बाद अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा पंजाब से किसी नए सिख चेहरे को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह दे सकती है।

क्या हरसिमरत कौर बादल की हो सकती है वापसी?

अगर भविष्य में भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की स्थिति बनती है, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की एक बार फिर मोदी मंत्रिपरिषद में वापसी की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है।

हरसिमरत कौर बादल एक महिला और सिख चेहरा हैं। ऐसे में पंजाब की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उनका नाम संभावित विकल्पों में देखा जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

मंत्रिपरिषद में फेरबदल के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को भी कोई बड़ी संगठनात्मक या राजनीतिक जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

फिलहाल मोदी सरकार में कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। ऐसे में नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करके मौजूदा मंत्रियों का कार्यभार कम किया जा सकता है।

वर्तमान में मंत्रिपरिषद में 29 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्य मंत्री हैं। प्रधानमंत्री को मिलाकर कुल संख्या 69 सदस्यों की है। संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के तहत मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक हो सकती है। इस हिसाब से सरकार के पास अभी और मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश है।

2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर होगा बड़ा फैसला

मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल को सिर्फ मौजूदा खाली पदों को भरने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों का चयन कर सकती है।

मंत्रियों का प्रदर्शन, आगामी विधानसभा चुनाव और अलग-अलग राज्यों में पार्टी की राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि कई नए नेताओं को केंद्र में जगह मिल सकती है।

सहयोगी दलों के नेताओं को भी मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से कुछ नए सहयोगी दलों को भी केंद्र में प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

AAP से भाजपा में आए राज्यसभा सांसदों पर भी नजर

आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसदों में से किसी एक या अधिक नेताओं को पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र में जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति में भी नए समीकरणों के चलते शिवसेना से श्रीकांत शिंदे के नाम की चर्चा हो रही है।

भाजपा के कई ऐसे बड़े नेता भी हैं जिन्हें पहले मंत्रिपद मिलने की अटकलें थीं, लेकिन उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सतीश पूनिया और तरुण चुग जैसे नाम शामिल हैं।

अब संभावना जताई जा रही है कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के लिए राज्यों से कुछ नए और युवा चेहरों को केंद्र में लाया जा सकता है।

कुल मिलाकर क्या बदल सकता है?

मोदी मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल कई राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। एक तरफ कुछ मंत्रियों की सदस्यता और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के कारण पद खाली होने की स्थिति बन रही है, तो दूसरी तरफ पंजाब समेत आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नए चेहरों को आगे बढ़ाने की तैयारी की चर्चा है।

अगर फेरबदल होता है तो इसमें मंत्रियों का प्रदर्शन, राज्यसभा की सदस्यता, संगठन में नई जिम्मेदारियां, आगामी चुनाव और सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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