मनोज जरांगे पाटील की बिगड़ी तबीयत, मेडिकल टीम को लौटना पड़ा खाली हाथ; मुंबई कूच के ऐलान से बढ़ी हलचल
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटील की तबीयत तीसरे दिन बिगड़ने की खबर से प्रशासन और उनके समर्थकों की चिंता बढ़ गई है। लगातार उपवास के कारण उनके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर में गिरावट दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। सोमवार रात स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम उनकी जांच करने के लिए अनशन स्थल पर पहुंची, लेकिन जरांगे पाटील ने चिकित्सकीय जांच कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद मेडिकल टीम को बिना जांच किए ही वापस लौटना पड़ा।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जरांगे पाटील की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय उपचार की जरूरत हो सकती है। मेडिकल टीम ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है। प्रशासन की ओर से उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार उपवास से स्वास्थ्य पर असर
मनोज जरांगे पाटील ने 29 अगस्त से अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की मांगों को लेकर अपना 11वां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है। उपवास के तीसरे दिन ही उनके स्वास्थ्य में गिरावट के संकेत सामने आने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि लगातार भोजन नहीं लेने के कारण उनके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर नीचे गया है। इससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की मेडिकल टीम पहले भी उनकी जांच कर चुकी है और स्वास्थ्य में बदलाव सामने आने के बाद टीम को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, सोमवार रात जब मेडिकल टीम दोबारा जांच के लिए पहुंची तो जरांगे पाटील ने जांच कराने से मना कर दिया। ऐसे में डॉक्टरों को उनकी स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय आकलन किए बिना ही वापस लौटना पड़ा।
क्या हैं मनोज जरांगे पाटील की प्रमुख मांगें?
जरांगे पाटील लंबे समय से मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है।
उनकी प्रमुख मांगों में मराठा समाज के लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देने, ‘सगे-सोयरे’ अधिसूचना को तत्काल लागू करने, तथा मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की मांग शामिल है।
जरांगे पाटील का जोर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर जल्द से जल्द ठोस फैसला करे और मराठा समाज को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
समर्थकों से मुंबई पहुंचने की अपील
अनशन के तीसरे दिन मनोज जरांगे पाटील ने अपने समर्थकों से मुंबई पहुंचने की अपील कर आंदोलन को और व्यापक बनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई पहुंचेंगे।
जरांगे ने समर्थकों को चरणबद्ध तरीके से मुंबई पहुंचने की रणनीति भी बताई है। ऐसे में आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन के लिए यह आंदोलन एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
फडणवीस सरकार बातचीत के लिए तैयार
दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार ने बातचीत के रास्ते खुले होने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि सरकार संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध मांगों पर चर्चा के लिए तैयार है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी मराठा समाज को आरक्षण दिए जाने के समर्थन की बात कही है। हालांकि, सरकार का स्पष्ट रुख है कि मराठा आरक्षण के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे अन्य समुदायों के मौजूदा आरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
अब सरकार और आंदोलन, दोनों पर नजर
मनोज जरांगे पाटील के अनशन का तीसरा दिन पूरा होने के साथ ही आंदोलन के अगले चरण को लेकर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है, तो दूसरी ओर मुंबई पहुंचने की उनकी अपील से आंदोलन के और बड़ा रूप लेने की संभावना है।
मेडिकल टीम द्वारा उपचार की आवश्यकता बताए जाने के बावजूद जरांगे पाटील का जांच से इनकार प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि सरकार और आंदोलन के बीच बातचीत की कोई राह निकलती है या फिर मराठा आरक्षण आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होता है।
अगर इसे न्यूज़ वेबसाइट के लिए और ज्यादा दमदार बनाना हो, तो बेहतर मुख्य शीर्षक हो सकता है: “जरांगे पाटील की बिगड़ी तबीयत, मेडिकल जांच से इनकार; अब मुंबई कूच की तैयारी, सरकार के सामने बढ़ी चुनौती”।

